उजाला टुडे संवाददाता :- संजय सोनपिपरे कोंडागांव
अबूझमाड़ मुठभेड़: शहीदों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि, नक्सलियों को अब तक का सबसे बड़ा झटका
छत्तीसगढ़: नारायणपुर अबूझमाड़ के बीहड़ जंगलों में बुधवार को हुई भीषण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 27 हार्डकोर नक्सलियों को ढेर कर दिया, जबकि एक बहादुर जवान ने देश की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज, पूरे राजकीय सम्मान के साथ शहीद जवान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई, वहीं इस ऐतिहासिक सफलता ने नक्सलवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
यह ऑपरेशन बुधवार सुबह से नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और अन्य सुरक्षाबलों द्वारा चलाया गया था। इस संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है। मारे गए नक्सलियों में 5 करोड़ का इनामी, नक्सली संगठन का पोलित ब्यूरो सदस्य और महासचिव बसवा राजू जैसे दुर्दांत कमांडर भी शामिल हैं। सुरक्षाबलों का दावा है कि इस एक मुठभेड़ ने नक्सली संगठन को दशकों बाद नेतृत्वहीन स्थिति में ला खड़ा किया है, जिससे उनकी संगठनात्मक क्षमता और मनोबल पर गहरा आघात पहुंचा है।
शहादत को नमन: नम आंखों से विदाई
दुखद रूप से, इस बड़ी कामयाबी के बीच, एक डीआरजी जवान ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। शहीद जवान को आज नारायणपुर में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उनके पार्थिव शरीर को उनके गृहग्राम ले जाया गया, जहाँ पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस दुखद घड़ी में, पूरा छत्तीसगढ़ शहीद जवान के परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ स्थल से सभी 27 नक्सलियों के शवों के साथ भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं, जिनमें अत्याधुनिक राइफलें और विस्फोटक भी शामिल हैं। क्षेत्र में अभी भी व्यापक तलाशी अभियान जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और नक्सली आसपास छिपा न हो।
सरकार का संकल्प: नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़
राज्य के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने इस मुठभेड़ को सुरक्षाबलों की अदम्य वीरता और रणनीतिक कुशलता का प्रमाण बताया है। उन्होंने शहीद जवान के बलिदान को नमन करते हुए दोहराया कि सरकार नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के लिए प्रतिबद्ध है। इस साल छत्तीसगढ़ में अब तक 200 से अधिक नक्सली मारे जा चुके हैं, जो दिखाता है कि सुरक्षाबलों के अथक प्रयास और रणनीति सही दिशा में हैं और नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में है।
यह मुठभेड़ दर्शाती है कि सुरक्षाबलों के हौसले बुलंद हैं और वे छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कराने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
