संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव: जब डोगरीगुड़ा ने लिया प्रकृति को बचाने का “हरा” संकल्प!


“एक पेड़ माँ के नाम”: सिर्फ नारा नहीं, एक एहसास!
यह कोई सामान्य वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत हर हाथ ने एक नन्हे पौधे को अपनी माँ की तरह पाला. यह सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का संदेश नहीं था, बल्कि प्रकृति के प्रति प्रेम और कृतज्ञता का एक गहरा एहसास था. कल्पना कीजिए, गाँव के लोग, बच्चे, और अधिकारी सब मिलकर मिट्टी में हाथ डालकर पौधे लगा रहे थे – एक ऐसा दृश्य जो सिखाता है कि बड़ा बदलाव छोटे कदमों से ही शुरू होता है.
प्लास्टिक के खिलाफ जंग: कचरों को “मैनेज” करने का मंत्र!
कार्यक्रम में सिर्फ पौधे ही नहीं लगाए गए, बल्कि प्लास्टिक प्रदूषण के दानव से लड़ने पर भी खुलकर बात हुई. वक्ताओं ने बताया कि कैसे हमारा फेंका हुआ प्लास्टिक हमारे पानी, हवा और यहाँ तक कि हमारे स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुँचा रहा है. संदेश साफ था: “कचरा सिर्फ फेंकने की चीज़ नहीं, उसे सही से ‘मैनेज’ करना हमारी ज़िम्मेदारी है.” लोगों को जैविक कचरे को अलग करने और दोबारा इस्तेमाल होने वाली चीज़ों का उपयोग करने जैसे छोटे, पर बेहद प्रभावी बदलावों को अपनाने की सलाह दी गई. यह सिर्फ ज्ञान नहीं था, बल्कि रोज़मर्रा की आदतें बदलने की प्रेरणा थी.
शपथ: प्रकृति के प्रति ‘संवेदनशील’ होने का वादा!
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया जब सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली. यह महज़ कुछ शब्द नहीं थे, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशील होने, अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने और लगातार पर्यावरण के लिए प्रयास करने का एक सामूहिक वादा था. इस शपथ में बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर किसी की आँखों में एक नई चमक और दृढ़ संकल्प दिखाई दिया.
इस कार्यक्रम में जिला मिशन समन्वयक रीना सिंह ठाकुर, जेंडर विशेषज्ञ माधुरी उसेण्डी, उमेश कुमार गरापी, मनोज कुमार साहू, सेक्टर पर्यवेक्षक हेमलता उड़कें, ग्राम पंचायत डोगरीगुड़ा के सरपंच, पंचगण, गणमान्य नागरिक, छात्र-छात्राएं और स्थानीय बच्चे मौजूद थे.

डोगरीगुड़ा ने आज यह साबित कर दिया कि पर्यावरण दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ हमारे रिश्ते को मजबूत करने का एक अवसर है. तो, क्या आप भी प्रकृति के प्रति अपना “हरा” संकल्प लेने के लिए तैयार हैं?
