संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव

कोंडागांव में “राष्ट्र के लिए मध्यस्थता” अभियान को लेकर बैठक का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य लंबित मुकदमों को मध्यस्थता के माध्यम से तेज़ी से और सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाना है. यह अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा चलाया जा रहा है.
अभियान का उद्देश्य और कार्यान्वयन
04 जुलाई 2025 को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश किरण चतुर्वेदी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रम प्रताप चन्द्रा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेशमा वैरागी पटेल, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शिव प्रकाश त्रिपाठी, और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोंडागांव की सचिव गायत्री साय सहित कई अधिवक्ता और अधिकार मित्र उपस्थित थे.
बैठक का मुख्य फोकस न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करना था, ताकि अदालतों में लंबित मामलों को मध्यस्थता के ज़रिए जल्दी और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सके. यह 90-दिवसीय अभियान भारत के सभी तालुका, जिला और उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों को निपटाने के लिए NALSA द्वारा चलाया जा रहा है.
न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं की भूमिका
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश किरण चतुर्वेदी ने इस अभियान के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि यह न्यायिक प्रणाली में लंबित मामलों को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक मामलों को मध्यस्थता के लिए उपयुक्त मानें और न्यायालय को इसकी जानकारी दें, ताकि दोनों पक्षों की सहमति से समाधान की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सके.
अधिवक्ताओं ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यस्थता से मामलों का शीघ्र और संतोषजनक निपटारा संभव है, जिससे मुवक्किलों का समय, श्रम और पैसा बचता है.
आगे की रणनीति
बैठक में यह भी तय किया गया कि उपयुक्त मामलों को प्राथमिकता के आधार पर मध्यस्थता केंद्र भेजा जाएगा. साथ ही, मुवक्किलों को मध्यस्थता की प्रक्रिया, इसके लाभों और परिणामों के बारे में जागरूक किया जाएगा. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव गायत्री साय ने अधिकार मित्रों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में शिविरों के माध्यम से मध्यस्थता प्रक्रिया का प्रचार-प्रसार करें, ताकि आपसी सहमति से विवादों का निपटारा किया जा सके.
