संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव

छत्तीसगढ़ में धान रोपाई पर सियासी ‘युद्ध’: फूलों देवी नेताम जमीन पर, मंत्री रजवाड़े कुर्सी पर
रायपुर, छत्तीसगढ़, 24 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ में धान रोपाई का मौसम आते ही सियासी गलियारों में भी ‘खेती’ की चर्चा गरम हो गई है. एक तरफ कांग्रेस की राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलों देवी नेताम खेत में उतरकर पारंपरिक तरीके से धान का रोपा लगा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ शासन की महिला बाल विकास मंत्री और भाजपा नेत्री लक्ष्मी रजवाड़े की कुर्सी पर बैठकर रोपा लगाते हुए तस्वीर वायरल हो गई है.
कांग्रेस सांसद फूलों देवी नेताम: ‘जमीन से जुड़ी नेता’ की छवि मजबूत
कांग्रेस सांसद फूलों देवी नेताम की धान के खेत में काम करते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. इन तस्वीरों में वह आम किसानों की तरह कीचड़ भरे खेत में घुटनों तक पानी में उतरकर रोपा लगाती दिख रही हैं. यह पहली बार नहीं है जब फूलों देवी नेताम को इस रूप में देखा गया हो; वह अक्सर अपने किसान पृष्ठभूमि का उल्लेख करती हैं और ग्रामीण जीवन से अपने जुड़ाव को प्रदर्शित करती हैं. उनकी यह तस्वीरें उनकी ‘जमीन से जुड़ी’ छवि को और मजबूत कर रही हैं.
मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े: कुर्सी पर बैठकर रोपा, विवादों में घिरीं
इसके उलट, मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े की एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें वह खेत में एक कुर्सी पर बैठकर धान का रोपा लगा रही हैं. यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. कुछ लोग इसे ‘पीआर स्टंट’ बता रहे हैं, जबकि कुछ अन्य उन पर खेती के पारंपरिक तरीकों का अनादर करने का आरोप लगा रहे हैं. विपक्ष ने भी इस पर तंज कसा है, जिसमें कहा जा रहा है कि खेती का यह नया तरीका प्रचार पाने का गलत तरीका है. हालांकि, लक्ष्मी रजवाड़े ने इस पर पलटवार करते हुए कहा है कि उन्हें खेती कैसे करनी है, यह कांग्रेसी न सिखाएं, क्योंकि उन्होंने खुद करीब 13 साल तक खेती की है.
राजनीतिक गलियारों में ‘नकल और अकल’ की बहस
यह घटनाक्रम छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘नकल के लिए अकल भी चाहिए’ वाली बहस को जन्म दे रहा है. जहाँ फूलों देवी नेताम अपनी सादगी और ग्रामीण जीवन से जुड़ाव के लिए प्रशंसा पा रही हैं, वहीं लक्ष्मी रजवाड़े की तस्वीर ने उन्हें आलोचना का शिकार बना दिया है. यह दर्शाता है कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं के हर कदम पर जनता की नजर रहती है, और जमीनी हकीकत से जुड़ाव अक्सर राजनीतिक छवि को मजबूत करता है.
यह देखना दिलचस्प होगा कि धान रोपाई के इस सियासी ‘नाटक’ का असर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति पर क्या पड़ता है.
