संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
शिक्षा के मैदान में नया ‘छक्का’: संयुक्त संचालक ने बच्चों संग खेला वॉलीबॉल, गणित की क्लास भी ली!
उजाला टुडे कोंडागांव 02 अगस्त 2025:- बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक (शिक्षा), राकेश पांडे, ने हाल ही में केशकाल ब्लॉक के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय, खाले मूरवैंड का एक अप्रत्याशित दौरा किया। यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि शिक्षा के प्रति उनके अनूठे दृष्टिकोण को दर्शाता था, जहाँ उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित करने के साथ-साथ बच्चों के साथ घुल-मिलकर उन्हें भी उत्साह से भर दिया।
प्रेरणा का नया अध्याय: दैनंदिनी और पाठ्यक्रम का सूक्ष्म अवलोकन
पांडे ने विद्यालय पहुँचते ही सबसे पहले प्रार्थना सभा में भाग लिया, जहाँ उन्होंने छात्रों और शिक्षकों के साथ सक्रिय रूप से सहभागिता की। प्रार्थना के उपरांत, उन्होंने सभी शिक्षकों की दैनंदिनी (डायरी) का बारीकी से निरीक्षण किया और पाठ्यक्रम विभाजन का भी सूक्ष्म अवलोकन किया। इस दौरान, उन्होंने शिक्षकों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए: “आप सभी अपनी दैनंदिनी में प्रतिदिन की शैक्षणिक योजनाओं, पढ़ाई जाने वाली विषय-वस्तु और दिए गए गृहकार्य का स्पष्ट उल्लेख नियमित रूप से करें। यह अभ्यास न केवल शिक्षण में निरंतरता सुनिश्चित करेगा, बल्कि इसकी गुणवत्ता को भी बढ़ाएगा।” यह उनका स्पष्ट संदेश था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना कितना आवश्यक है।

गणित की क्लास में संयुक्त संचालक बने ‘शिक्षक’, बढ़ाई छात्रों की रुचि
निरीक्षण के दौरान, पांडे ने सीधे कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने गणित विषय के बीजीय व्यंजक से संबंधित एक जटिल प्रश्न को स्वयं पढ़ाकर समझाया। इस पहल से छात्रों में विषय के प्रति एक नई रुचि जागी और उन्होंने मुश्किल सवालों को समझने में अधिक आत्मविश्वास महसूस किया। उन्होंने शिक्षकों को भी प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे कक्षा में प्रभावी शिक्षण के लिए पाठ की पूर्व तैयारी को प्राथमिकता दें। उनका मानना था कि तैयारी के साथ कक्षा में प्रवेश करने से शिक्षक छात्रों के प्रश्नों का बेहतर तरीके से उत्तर दे पाते हैं और शिक्षण प्रक्रिया अधिक सुगम हो जाती है।
वॉलीबॉल के मैदान पर ‘गुरू-शिष्य’ का नया रिश्ता: खेल से मिली शिक्षा की प्रेरणा
शायद इस निरीक्षण का सबसे यादगार पल तब आया जब संयुक्त संचालक पांडे ने बच्चों के साथ वॉलीबॉल खेला। उनके इस कदम ने औपचारिकताओं की दीवार तोड़ दी और बच्चों को उनके करीब आने का मौका दिया। उन्होंने बच्चों को खेल गतिविधियों में नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित किया, यह दर्शाते हुए कि शारीरिक गतिविधि और खेल भी शिक्षा का एक अभिन्न अंग हैं। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य सहित समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे, जो इस अनूठे निरीक्षण के साक्षी बने।

दूरगामी प्रभाव: शिक्षा और खेल का संगम
राकेश पांडे का यह निरीक्षण केवल एक प्रशासनिक दौरा नहीं था, बल्कि यह शिक्षकों के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शन और बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। उनके इस अनूठे तरीके ने यह सिद्ध किया कि शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने की बजाय, उसे व्यावहारिक और आनंदमय बनाया जा सकता है। यह पहल निश्चित रूप से विद्यालय के शैक्षणिक और खेल संबंधी वातावरण में सकारात्मक बदलाव लाएगी।

