संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
राज्य स्तरीय खेल आयोजन में बड़ी लापरवाही: मधुमक्खी हमले से खिलाड़ी घायल, अधिकारी बोले- ‘हमें जानकारी नहीं’
उजाला टुडे कोण्डागांव, 28 अगस्त 2025/ कोण्डागांव में चल रही 25वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के उत्साह के बीच व्यवस्थाओं में बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों पर मधुमक्खियों ने हमला कर दिया, जिससे तीन खिलाड़ी घायल हो गए। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर घटना के बाद भी अधिकारियों ने इससे पल्ला झाड़ लिया, जिससे खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों में गहरा आक्रोश है।
जिला मुख्यालय के स्टेडियम मैदान में 28 से 31 अगस्त तक आयोजित इस प्रतियोगिता में पूरे प्रदेश से 700 से अधिक खिलाड़ी और अधिकारी जुटे हैं। खेल महोत्सव की शुरुआत गुरुवार सुबह धूमधाम से हुई, जिसमें मार्च-पास्ट और उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। लेकिन, रात में हुई एक अप्रिय घटना ने इस आयोजन की पोल खोल दी।
रात के अंधेरे में मधुमक्खियों का हमला, तीन खिलाड़ी घायल
दुर्भाग्यपूर्ण घटना उस समय हुई जब रायपुर ज़ोन के खिलाड़ी रात में अपने विश्राम स्थल पर थे। अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले से अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार, तीन खिलाड़ी इस हमले में घायल हो गए, जिनमें एक फुटबॉल खिलाड़ी रुद्र भी शामिल हैं।
घायल खिलाड़ी रुद्र ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, “रात में मुझ पर और मेरे साथियों पर मधुमक्खियों ने काट लिया। दर्द के कारण हम पूरी रात सो नहीं पाए। आज सुबह हमारा फुटबॉल मुकाबला है। इस हालत में हम मैदान में कैसे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दे पाएंगे?”
विधायक लता उसेंडी ने घायल खिलाड़ियों से मुलाकात कर सुरक्षा का आश्वासन दिया
मधुमक्खी हमले की घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय विधायक लता उसेंडी ने तत्काल स्टेडियम पहुंचकर घायल खिलाड़ियों से मुलाकात की। उन्होंने खिलाड़ियों का हालचाल जाना और उन्हें हरसंभव मदद और सुरक्षा का आश्वासन दिया।
विधायक का यह कदम जिला शिक्षा अधिकारी के उस बयान के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें उन्होंने खिलाड़ियों के घायल होने की जानकारी से इनकार कर दिया था। विधायक के इस हस्तक्षेप से खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों में भरोसा जागा है, जिन्हें पहले अधिकारियों की लापरवाही से निराशा हुई थी।
अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना बयान
इस दर्दनाक अनुभव के बाद, जब खिलाड़ियों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई, तो जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान का बयान चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी भी खिलाड़ी के मधुमक्खी हमले में घायल होने की कोई जानकारी नहीं है। अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों के गुस्से को और बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब राज्य स्तर की प्रतियोगिता हो रही है, तो खिलाड़ियों के रहने, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की जिम्मेदारी क्यों नहीं ली गई? खिलाड़ियों को ऐसे असुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया, जहां उनकी जान जोखिम में पड़ गई। इस घटना ने खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ दिया है और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाला है।
प्रतियोगिता की सफलता तभी मानी जाएगी, जब खिलाड़ी सुरक्षित वातावरण में अपनी प्रतिभा दिखा सकें। इस घटना से सबक लेकर आयोजन समिति को तुरंत सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।


