संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
खेती की नई राह: कोंडागांव के आदिवासी किसान बनेंगे आधुनिक भारत के अन्नदाता
उजाला टुडे कोंडागांव 28 अगस्त 2025:कोण्डागांव के सुदूर गांवों में रहने वाले आदिवासी किसानों के लिए खेती सिर्फ़ एक काम नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। लेकिन अब, इस पारंपरिक तरीक़े में आधुनिकता का रंग भरने की शुरुआत हो चुकी है।
अम्बुजा फाउंडेशन और एचडीएफसी बैंक परिवर्तन के सहयोग से, 30 आदिवासी किसानों को खेती की एक नई दुनिया से परिचय कराया गया। सरकारी उद्यान रोपणी, कोपाबेड़ा में आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण में, इन किसानों को सिर्फ़ जानकारी नहीं दी गई, बल्कि उन्हें भविष्य का रास्ता भी दिखाया गया।
कार्यक्रम में, किसानों को हाथ से पकड़कर सिखाया गया कि कैसे खेत की तैयारी की जाए, कैसे सही दूरी पर पौधे लगाएं और कैसे अपनी बागवानी फसलों की देखभाल करें। रोपणी प्रभारी लोकेश्वर प्रसाद ने उन्हें बताया कि कैसे वे कृषि वानिकी को अपनाकर एक ही ज़मीन के टुकड़े से कई गुना ज़्यादा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। यह सिर्फ़ खेती का तरीका नहीं, बल्कि जीवन स्तर सुधारने का एक मूलमंत्र था।
प्रशिक्षण का असली मकसद किसानों को सिर्फ़ सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें यह भरोसा दिलाना था कि सरकारी योजनाएं और आधुनिक तकनीकें उनके साथ हैं। यह आयोजन सिर्फ़ एक दिन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक सपने की शुरुआत थी—हर किसान के लिए एक समृद्ध और ख़ुशहाल जीवन का सपना।
यह पहल दिखाती है कि अगर हम सही ज्ञान और सही दिशा दें, तो पारंपरिक किसान भी आधुनिक भारत की कृषि क्रांति का हिस्सा बन सकते हैं।


