
संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव को बड़ी राहत: ₹5 लाख की इनामी महिला नक्सली ‘कमली सलाम’ का आत्मसमर्पण, पूर्वी बस्तर डिवीजन को तगड़ा झटका
असुरक्षा, अंदरूनी लड़ाई और विकास की चाहत ने माओवादी कमांडर को मुख्यधारा में लौटने पर किया मजबूर
उजाला टुडे कोंडागांव 15 अक्टूबर 2025- कोंडागांव/जगदलपुर। बस्तर में सुरक्षा बलों के नक्सल विरोधी अभियान को आज (दिनांक 15 अक्टूबर 2025) एक बड़ी सफलता मिली है। कोंडागांव जिले में, 5 लाख रुपये की इनामी और पूर्वी बस्तर डिवीजन में सक्रिय टेलर टीम कमांडर (ACM), महिला नक्सली गीता उर्फ कमली सलाम (उम्र 40 वर्ष) ने पुलिस अधीक्षक, कोंडागांव के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
आईजी, बस्तर रेंज सुंदरराज पी. और एसपी कोंडागांव वाय अक्षय कुमार के मार्गदर्शन में चल रहे लगातार दबाव का यह सीधा परिणाम है।
क्यों टूट रहे हैं नक्सली? आत्मसमर्पण के तीन मुख्य कारण
महिला नक्सली गीता सलाम के आत्मसमर्पण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संगठन भीतर से कमजोर हो रहा है। इसके मुख्य कारण हैं:
- संगठन में खलबली: लगातार शीर्ष नक्सलियों के मारे जाने और संगठन के भीतर पनपते आंतरिक मतभेद।
- मुख्यधारा की चमक: नक्सली जीवन की असुरक्षा को छोड़कर, सुरक्षित पारिवारिक जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की तीव्र इच्छा।
- विकास का असर: सरकार की सड़कें, बिजली, पानी, मोबाइल नेटवर्क और जन कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ अब ग्रामीणों तक पहुँच रहा है, जिससे माओवादी भी प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें अपनी राह गलत लगने लगी है।
तत्काल प्रोत्साहन और पुनर्वास की पहल
आत्मसमर्पण के तुरंत बाद, छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन नीति के तहत महिला माओवादी को ₹50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि तत्काल प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार की नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत अन्य सभी सुविधाओं और लाभों को सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कोंडागांव के पुलिस अधीक्षक वाय अक्षय कुमार ने बताया कि नक्सल प्रभावित गाँवों में सिविक एक्शन कार्यक्रम और पुनर्वास नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार लगातार किया जा रहा है, जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है।
अपराधिक रिकॉर्ड: दर्ज हैं हत्या और ग्रामीणों को बेदखल करने के मामले
गीता उर्फ कमली सलाम पूर्वी बस्तर डिवीजन के टेलर टीम कमांडर के पद पर सक्रिय थी और उसके खिलाफ थाना बयानार में हत्या, ग्रामीणों को पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर घर से बेदखल करने, मारपीट और आम्र्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत कई मामले दर्ज हैं।
इस आत्मसमर्पण से स्पष्ट है कि सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों और सुरक्षा बलों के दबाव के आगे अब नक्सली संगठन टिक नहीं पा रहा है।

