संजय सोनपिपरे संपादक,उजाला टुडे कोंडागांव
‘देवता’ को पूजने के लिए बंदूक का लाइसेंस! बस्तर में अनोखी मांग, 1910 में अंग्रेज से छीनी गई रायफल को ‘डुमादेव’ बनाने की तैयारी
उजाला टुडे कोंडागांव – कोंडागांव :दैवीय प्रकोप और अकाल मृत्यु से डरे परिजन, पूर्वजों की ‘वीरता’ के प्रतीक को कानूनी जामा पहनाने की कवायद, प्रशासन हैरान
बस्तर (छत्तीसगढ़): इतिहास, आस्था और क़ानून का त्रिकोण
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर संभाग से एक ऐसा अद्भुत और अप्रत्याशित मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। यहां एक परिवार ने दैवीय प्रकोप से बचने के लिए उस ऐतिहासिक बंदूक का लाइसेंस मांगा है, जिसे उनके पूर्वज ने करीब 115 साल पहले 1910 के भूमकाल विद्रोह के दौरान एक अंग्रेज सिपाही से छीन लिया था।
बंदूक की कहानी, देवता बनने तक:
बस्तर के कोंडागांव ज़िले के लोहंडीगुड़ा क्षेत्र के एरमूर गांव के ग्रामीणों के अनुसार, उनके पूर्वज मुंडरा ने विद्रोह के दौरान बहादुरी दिखाते हुए एक ब्रिटिश सैनिक को मारकर उसकी रायफल पर कब्जा कर लिया था।
- वीरता की विरासत: यह बंदूक परिवार के लिए महज़ एक हथियार नहीं, बल्कि पूर्वज की वीरता और शौर्य का प्रतीक बन गई थी। परंपरा के अनुसार, इसे उनके कुलदेवता ‘डुमादेव’ को अर्पित किया गया और वर्षों तक इसकी पूजा होती रही।
- दैवीय अशांति: कुछ साल पहले परिवार में लगातार दुर्भाग्य, बीमारी और अकाल मृत्यु की घटनाएं होने लगीं। इसे ‘देवता’ की नाराजगी मानकर बंदूक को अशुभ समझा गया और गुमियापाल के पास फेंक दिया गया।
- पुनःस्थापना की मांग: परिवार में अशांति कम न होने पर गांव के सिरहा (पुजारी) ने हाल ही में सुझाव दिया कि समस्या की जड़ बंदूक को फेंकना है। पुजारी ने उसे पुनः लाकर ‘देव स्वरूप’ में स्थापित करने का निर्देश दिया।
- लाइसेंस की मजबूरी: धार्मिक विधि-विधान पूरा करने और इसे स्थायी रूप से पूजने के लिए अब नई पीढ़ी ने प्रशासन से इस बंदूक को कानूनी मान्यता देने यानी लाइसेंस देने की गुहार लगाई है।
प्रशासन के लिए अजीब स्थिति:
आम तौर पर, बंदूक का लाइसेंस आत्मरक्षा, खेल या शिकार के लिए जारी किया जाता है, लेकिन यह भारत का संभवतः पहला मामला है जहां ‘दैवीय अनुष्ठान’ के लिए लाइसेंस मांगा गया है।
यह अनूठा आवेदन वर्तमान में कलेक्टर कार्यालय में विचाराधीन है। इस ऐतिहासिक और भावनात्मक मांग पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

