संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
⛰️ ग्रामीणों ने दिखाई हिम्मत, शासन को आईना! पहाड़ काटकर खुद बना रहे 10 KM लंबी सड़क
79 साल से विकास की राह ताक रहा केशकाल का नंदगट्टा गांव, सुविधाएँ नहीं मिलीं तो शुरू किया ‘श्रमदान आंदोलन’
नंदगट्टा (केशकाल, कोंडागांव, छत्तीसगढ़):
उजाला टुडे कोंडागांव 30 अक्टूबर 2025- केशकाल विधानसभा क्षेत्र के नंदगट्टा गांव के आदिवासी ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन की उदासीनता से तंग आकर एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी सड़क, नाली, पेयजल और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित इस गांव के लोगों ने, अब खुद ही अपने हाथों से पहाड़ काटकर सड़क बनाने का बीड़ा उठाया है।
लापरवाही की इंतहा: कागजों में विकास, जमीन पर दुर्गम रास्ता
नंदगट्टा, केशकाल विकास खंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत होनेहेड का आश्रित गांव है। यह विकास खंड मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने ग्राम सरपंच से लेकर विधायक और कलेक्टर तक को बुनियादी सुविधाओं के लिए कई बार ज्ञापन दिए, लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कुएंमारी तक तो पक्की सड़क बन गई, लेकिन उससे महज 5 से 10 किलोमीटर की दूरी पर बसे नंदगट्टा तक पहुंचने का कोई उचित मार्ग नहीं है। क्षेत्र के लोगों को कटीली झाड़ियों, चट्टानों और छोटी-बड़ी पहाड़ियों से होते हुए जान जोखिम में डालकर आना-जाना पड़ता है।
हर घर से निकले औजार, पहाड़ का सीना चीरने का संकल्प
प्रशासन की तरफ से कोई मदद न मिलने पर आखिरकार ग्रामीणों ने हार नहीं मानी। उन्होंने गांव में एक सार्वजनिक बैठक आयोजित की और सामूहिक रूप से सड़क बनाने की योजना बनाई।
पिछले एक महीने से इस गांव में एक अनोखा श्रमदान आंदोलन चल रहा है। रोजाना, प्रत्येक घर से दो से तीन सदस्य अपने कृषि उपकरण— फावड़ा, कुदाल, गैती, कुल्हाड़ी और साबल— लेकर पहाड़ पर पहुंच रहे हैं। वे दिन-रात एक कर चट्टानों की सीना चीरते हुए सड़क बनाने के कार्य में जुटे हुए हैं।
ग्रामीणों का यह सामूहिक प्रयास न केवल उनके अदम्य साहस को दर्शाता है, बल्कि स्थानीय शासन-प्रशासन की लचर व्यवस्था पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है, जो आदिवासी बहुल क्षेत्र में विकास पहुँचाने में विफल रहा है।

