
संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
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सिर्फ़ ₹1910 मानदेय से ‘बिहान’ की महिलाएं नाराज! “इतने कम पैसे में काम करना अपमानजनक,” सरकार को 7 सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर दी राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
‘बिहान’ की सक्रिय महिलाएं बोलीं — ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं, हमें मिले सम्मानजनक मानदेय, नहीं तो करेंगे आंदोलन
उजाला टुडे कोंडागांव 30 अक्टूबर 2025- छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM/बिहान) के अंतर्गत कार्यरत सीआरपी/सक्रिय महिला संघ ने आज राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महिलाओं ने अपनी मेहनत और सम्मान के लिए मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री तथा शासन-प्रशासन को एक सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है, जिसमें मानदेय में तत्काल वृद्धि की मांग की गई है।
संगठन की संरक्षक बिंदु यादव, अध्यक्ष पदमा पाटिल और सलाहकार विश्वजीत हारोडे ने संयुक्त रूप से बताया कि राज्यभर की सक्रिय महिलाएं ग्रामीण विकास योजनाओं की वास्तविक रीढ़ हैं। ये महिलाएं गांव-गांव जाकर स्वसहायता समूह (SHG) बनाती हैं, साप्ताहिक मीटिंग लेती हैं, बैंक खाते खुलवाती हैं, लोन दिलवाती हैं, साथ ही ऑडिट, सर्वे, बीमा और आजीविका से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विभागीय कार्य संभालती हैं।
लेकिन, इन महत्वपूर्ण कार्यों के बदले उन्हें वर्तमान में मात्र ₹1910 प्रतिमाह का मानदेय दिया जा रहा है, जिसे संघ ने अत्यंत नगण्य और अपमानजनक बताया है।
डबल ड्यूटी, जीरो मेहनताना
महिलाओं का आरोप है कि विभागीय कार्यों के अलावा उन पर लोकोस (Locus), VPRP (विलेज पावर्टी रिडक्शन प्लान) और लखपति दीदी जैसे ऑनलाइन कार्यों की बड़ी जिम्मेदारी भी है। इससे भी अधिक, उन्हें स्वच्छता अभियान, जल जीवन मिशन, आयुष्मान कार्ड, वृक्षारोपण और मन के गोठ जैसे गैर-विभागीय कार्यों में भी लगाया जाता है, जिसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त मेहनताना नहीं दिया जाता।
आर्थिक शोषण के आरोप
सक्रिय महिला संघ ने शासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सक्रिय महिलाओं को ₹6000 मासिक मानदेय दिया जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ में मानदेय की राशि महीनों तक लंबित रहती है और कई जिलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के मानदेय की राशि काट ली जाती है।
संघ की 7 सूत्रीय प्रमुख मांगें
- मानदेय में तत्काल सम्मानजनक वृद्धि की जाए।
- भुगतान न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुरूप हो।
- ऑनलाइन कार्य (लोकोस, VPRP आदि) की लंबित राशि का शीघ्र वितरण किया जाए।
- कार्य के लिए मोबाइल व नेट भत्ता और यात्रा भत्ता प्रदान किया जाए।
- मानदेय का हस्तांतरण नियमित रूप से बैंक खाते में हो।
- सभी सक्रिय महिलाओं को नियुक्ति पत्र दिया जाए।
- पद का नियमितीकरण किया जाए।
चेतावनी: सक्रिय महिला संघ ने शासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपनी गरिमा और हक के लिए राज्यव्यापी उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगी।


