
संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
🚨 वन मंत्री के ‘सहमति’ बयान पर उठे सवाल: कोंडागांव में हॉट मिक्स प्लांट पर बड़ा विवाद, नियमों को ताक पर रखकर जारी संचालन!
उजाला टुडे कोंडागांव 19 नवम्बर 2025- कोंडागांव: जिला मुख्यालय कोंडागांव का ग्राम पंचायत चिखलपुटी एक बार फिर सुर्खियों में है, वजह है वन विभाग की भूमि पर ‘रितेश अग्रवाल एंड कंपनी’ द्वारा नियमों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा हॉट मिक्स प्लांट। PF-447 दहीकोंगा वन परिक्षेत्र की जमीन पर बिना पर्यावरण और वन विभाग की अनुमति के स्थापित इस प्लांट को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, खासकर तब जब स्वयं ठेकेदार लिखित में प्लांट बंद करने की बात कह चुका है, और वन मंत्री ने इसे ‘आपसी सहमति’ से लगा होना बताया है।
तीन नोटिस, लिखित वादा… फिर भी जारी संचालन
वन विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि यह अवैध संचालन मई 2025 से विवादों में है। विभाग ने ठेकेदार को प्लांट हटाने के लिए मई 2025 में पहला, और जून 2025 तक कुल तीन नोटिस जारी किए थे।
मामले की गंभीरता तब बढ़ गई जब ठेकेदार रितेश अग्रवाल एंड कंपनी ने 25 जून 2025 को वन विभाग को एक लिखित पत्र दिया। इस पत्र में उन्होंने प्लांट को वन अधिकार मान्यता पत्र प्राप्त भूमि पर स्थापित होना स्वीकार किया और 26 जून तक इसे बंद कर अन्यत्र स्थानांतरित करने का वादा किया था। पत्र में 24 जून से संचालन बंद करने का उल्लेख भी था।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि नवंबर 2025 में भी यह डामर प्लांट बेधड़क चल रहा है।
वन मंत्री के बयान पर कांग्रेस का सीधा हमला
प्लांट के लगातार संचालन पर अब विपक्ष ने सीधे वन मंत्री केदार कश्यप पर निशाना साधा है। कांग्रेस कोंडागांव के जिला महामंत्री रितेश पटेल ने मंत्री के हालिया बयान को आधार बनाकर सवाल खड़े किए हैं।
(कोंडागांव कांग्रेस जिला महामंत्री रितेश पटेल)
रितेश पटेल ने कहा, “हाल ही में कोंडागांव दौरे के दौरान जब मीडिया ने वन मंत्री जी से इस अवैध प्लांट पर कार्रवाई के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा था कि ‘प्लांट आपसी सहमति से लगाया गया है।’ मेरा सीधा सवाल है— क्या यह सहमति स्वयं वन मंत्री केदार कश्यप की है?”
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस बायपास सड़क निर्माण के खिलाफ नहीं है, लेकिन वन क्षेत्र में नियमों को दरकिनार कर अवैध निर्माण या संचालन को कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता।
आम नागरिक बनाम रसूखदार ठेकेदार
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि:
”वन विभाग गरीब या आम नागरिक द्वारा नियम विरुद्ध कार्य होने पर तत्काल बुलडोजर चलाता है, लेकिन रसूखदार ठेकेदारों पर कार्रवाई करने से क्यों बच रहा है?”
अवैध प्लांट को हटाने की मांग को लेकर कलेक्टर जनदर्शन में भी शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बंद करने की लिखित घोषणा के बाद भी प्लांट का दोबारा शुरू हो जाना, सीधे तौर पर वन विभाग की कार्यप्रणाली की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
आगे क्या?
मामला अब केवल वन विभाग के नियमों के उल्लंघन का नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का भी बन गया है। अब देखना यह है कि क्या वन विभाग इस हाई-प्रोफाइल मामले में नियमानुसार कार्रवाई करेगा, या रसूख और प्रभाव के आगे यह मामला फिर दब जाएगा।




