संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
📰 बच्चों के खेल मैदान पर ‘न्याय’ का ग्रहण! कोंडागांव में जिला सत्र न्यायालय भवन निर्माण पर सवाल
उजाला टुडे कोंडागांव 25 नवम्बर 2025- कोंडागांव: शहर के गांधी वार्ड स्थित पीएम श्री आत्मानंद स्कूल का हरा-भरा खेल मैदान अब जिला सत्र न्यायालय भवन के निर्माण स्थल में बदल रहा है। इस मैदान पर कंक्रीट की इमारत खड़ी करने के फैसले ने स्थानीय बच्चों, अभिभावकों और खेल प्रेमियों में गहरा रोष पैदा कर दिया है। इसे बच्चों के खेल के स्वाभाविक अधिकार का हनन और जनहित के विपरीत कदम बताया जा रहा है।
तत्कालीन अधिकारियों के फैसले पर उठे सवाल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर के बीचों-बीच स्थित इस सुंदर और बड़े खेल मैदान को भवन निर्माण के लिए आवंटित करने का निर्णय तत्कालीन अधिकारियों की अदूरदर्शिता का परिणाम है। आरोप है कि कोंडागांव के मैदानों और बच्चों के भविष्य से ‘कुछ लेना-देना’ न रखने वाले अधिकारियों ने एक-दो साल के कार्यकाल में यह फैसला लेकर बच्चों के भविष्य पर चोट की है।
”एक-दो साल रहकर कहीं और चले जाने वाले अधिकारियों ने मैदान आवंटित कर दिया। लेकिन इसका खामियाजा यहां के बच्चे और पालक भुगतेंगे। यह सरासर अन्याय है।”
⚖️ ‘न्याय’ के मंदिर के लिए बच्चों के अधिकार का हनन?
निर्माण का विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि न्याय का मंदिर बनाने के लिए बच्चों के खेलने के अधिकार को छीनना न्यायपालिका की छवि के विपरीत है। कुछ लोग यह कहकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं कि ‘इस मैदान में खेल कर कौन से बच्चे ने अपना कैरियर बना लिया’, जिस पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
एक पालक ने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर परिवार में कोई आईएएस या आईपीएस नहीं बना, तो क्या हम अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दें? ठीक उसी तरह, खेल बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अति आवश्यक है, यह उनका स्वाभाविक अधिकार है।”
खेल का महत्व एक बच्चा, एक पालक, या फिर वह खिलाड़ी ही समझ सकता है जिसने खेल में अपना जीवन समर्पित किया है। नागरिकों ने माननीय न्यायाधीशों से इस अन्यायपूर्ण निर्माण को रोकने की अपील की है।
वैकल्पिक स्थान की मांग: कलेक्टर परिसर में समायोजन
स्थानीय नागरिक और अभिभावक मांग कर रहे हैं कि माननीय न्यायमूर्ति जनहित और बच्चों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करें। उनकी मांग है कि कोर्ट भवन को कलेक्टर परिसर जैसे उपलब्ध सरकारी परिसर के अंदर ही समायोजित किया जाए।
इससे न केवल कोर्ट भवन की गरिमा बनी रहेगी, बल्कि बच्चों को उनका खेल का मैदान भी वापस मिल जाएगा। बच्चों के विकास और न्याय की सर्वोच्च भावना को बनाए रखने के लिए इस वैकल्पिक सुझाव पर विचार करना अत्यंत आवश्यक है।


