संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
सबसे बड़ी खबर: कई एकड़ सरकारी जमीन पर ‘राजा राम त्रिपाठी’ का कब्ज़ा! कोंडागाँव के ग्रामीणों ने दिया ‘एक हफ़्ते’ का अल्टीमेटम
फरसागुड़ा जूनाबाई (कोंडागाँव) से ग्राउंड रिपोर्ट
उजाला टुडे कोंडागांव 5 दिसम्बर 2025- कोंडागाँव छत्तीसगढ़: कोंडागाँव जिले के फरसागुड़ा जूनाबाई गाँव से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। गाँव के बच्चों के स्कूल और सार्वजनिक विकास के लिए आरक्षित कई एकड़ भूमि पर कथित तौर पर एक स्थानीय व्यवसायी राजाराम त्रिपाठी ने कब्जा जमा रखा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने अब इस जमीन को खाली कराने के लिए खुद मोर्चा संभाल लिया है और प्रशासन के साथ-साथ कब्जेदार को भी सीधी चुनौती दी है।
मुख्य आरोप और ‘पट्टा’ की आड़ में खेल
सामाजिक कार्यकर्ता कमला नेताम के नेतृत्व में, ग्रामीणों ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि व्यवसायी ने चतुराई से एक आदिवासी महिला के नाम पर ली गई पट्टा जमीन की आड़ में इस विशाल सरकारी भूखंड पर वर्षों से अवैध कब्जा कर रखा है।
- लंबे संघर्ष का नतीजा: ग्रामीणों ने बताया कि वे 2020 से इस जमीन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
- प्रशासन का नोटिस बेअसर: ग्रामीणों के दबाव के बाद, तहसीलदार ने दिसंबर 2024 को राजाराम त्रिपाठी सर को जमीन खाली करने का आधिकारिक नोटिस जारी किया था।
- नोटिस की अनदेखी: ग्रामीणों का आरोप है कि नोटिस जारी होने के बावजूद, व्यवसायी ने ज़मीन खाली नहीं की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे प्रशासनिक आदेशों की भी खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।
‘बच्चों का भविष्य खतरे में’: विकास कार्य ठप
गाँव वालों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि सरकारी जमीन पर कब्जे के कारण गाँव का विकास पूरी तरह से रुक गया है।
कमला नेताम और अन्य ग्रामीणों ने वीडियो में कहा, “हमारे बच्चों के लिए स्कूल बनाने की जगह नहीं है, आंगनबाड़ी नहीं है, क्योंकि कई एकड़ जमीन पर कब्जा है। यह जमीन सरकारी है और इस पर गाँव का हक है।”
ग्रामीणों का अंतिम ऐलान: ‘ऑपरेशन खाली’ की तैयारी
निराश और क्रुद्ध ग्रामीणों ने अब प्रशासन पर निर्भर रहने के बजाय खुद कार्रवाई करने का कठोर निर्णय लिया है। उन्होंने व्यवसायी राजाराम त्रिपाठी को सीधा और अंतिम अल्टीमेटम दिया है:
“हम आपसे निवेदन करते हैं कि ज़मीन खुद खाली कर दें। अगर आप एक सप्ताह के भीतर ऐसा नहीं करते हैं, तो पूरा गाँव एकजुट होकर इस कई एकड़ सरकारी ज़मीन को अपने तरीके से खाली करवाएगा।”
ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन अब उनके बच्चों के बेहतर भविष्य और गाँव के विकास के लिए समर्पित की जाएगी। इस घटना ने कोंडागाँव जिले में अवैध कब्जों के खिलाफ एक बड़े जनांदोलन की नींव रख दी है।

