संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव बंधा गार्डन घोटाला: 1 करोड़ 79 लाख 30 हज़ार रुपये की लागत हवा-हवाई! 3 माह का काम एक साल लटकाया, अब खुले में दिख रहा ‘करप्शन का मॉडल’!
बंधा गार्डन जीर्णोद्धार पर बड़ा सवाल: पैसा खर्च हुआ, तो काम कहाँ गया? जनता ने कहा- ‘यह विकास नहीं, खुलेआम लूट है!’
उजाला टुडे कोंडागांव 6 दिसम्बर 2025- कोंडागांव छत्तीसगढ़: कोंडागांव शहर के नागरिकों को राहत देने के बजाय एक बड़े घोटाले का संकेत देने वाला मामला सामने आया है। लगभग एक वर्ष के विलंब और नागरिकों के लगातार विरोध के बाद, स्थानीय विधायक लता उसेंडी के हस्तक्षेप पर, बहुप्रतीक्षित बंधा गार्डन को जनता के लिए खोला गया। मगर, जो मंजर सामने आया है, उसने करोड़ों के जीर्णोद्धार पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
1 करोड़ 79 लाख 30 हज़ार रुपये की लागत पर ‘नज़राना’, काम पर ‘गुमशुदा’
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, बंधा गार्डन के जीर्णोद्धार पर कुल 1 करोड़ 79 लाख 30 हज़ार रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। इस परियोजना को सिर्फ 3 माह में पूरा करने की योजना थी।
जनता का सीधा आरोप:
गार्डन परिसर के अंदर की स्थिति, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और अधूरे पड़े काम को देखकर 1.79 करोड़ रुपये की लागत कहीं से भी न्यायसंगत नहीं लगती।
कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य अभी भी अपूर्ण हैं, जबकि राशि पूर्णतः खर्च किए जाने का दावा किया जा रहा है।
यह विलंब ठेकेदार की अत्यधिक मनमानी और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है, जिसने नगरवासियों को एक साल तक असुविधा में रखा।
“हमारा पैसा कहाँ गया? यह विकास नहीं, खुलेआम लूट है। गार्डन को देखकर कोई भी आम नागरिक कह सकता है कि इतना पैसा खर्च नहीं हुआ है। यह 1.79 करोड़ का सीधा घोटाला है,” एक स्थानीय नागरिक ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा।
विधायक के निर्देश पर खुली ‘पोल’
नगरवासियों की लगातार शिकायतों और बढ़ते आक्रोश के बीच, स्थानीय विधायक लता उसेंडी ने मामले को संज्ञान में लिया और गार्डन को तुरंत आम जनता के लिए खोलने का निर्देश दिया। विधायक के इस कदम ने जनता को राहत तो दी, लेकिन साथ ही भ्रष्टाचार की ‘पोल’ भी खोल दी। अगर विधायक हस्तक्षेप न करतीं, तो शायद यह ‘करप्शन का मॉडल’ अभी भी बंद दरवाजे के पीछे छिपा रहता।
शासन से मांग: टीम गठित कर 0/% टॉलरेंस की नीति पर हो कार्रवाई!
कोंडागांव की जनता और सजग नागरिक संगठन इस गंभीर मामले पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं:
सूक्ष्म जांच टीम: तत्काल एक उच्च-स्तरीय, स्वतंत्र जांच दल (विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम) गठित की जाए, जो 1.79 करोड़ रुपये की लागत और मौजूदा काम के भौतिक मूल्यांकन का सूक्ष्म ऑडिट करे।
ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट: दोषी ठेकेदार पर सरकारी राशि के दुरुपयोग, घटिया निर्माण और विलंब के लिए तुरंत कानूनी कार्यवाही की जाए और उसे स्थायी रूप से ब्लैक लिस्ट किया जाए।
मूल्यांकनकर्ता अधिकारी पर कार्रवाई: निर्माण कार्य की देखरेख और मूल्यांकन करने वाले संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कठोर जांच शुरू की जाए, जिन्होंने अधूरे और गुणवत्ताहीन काम को ‘ओके’ रिपोर्ट दी।
कोंडागांव की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ‘कार्रवाई’ देखना चाहती है। प्रशासन को इस जनहित के मामले में तुरंत सख्ती दिखानी होगी!








