(संभागीय अध्यक्ष (बस्तर) भानू पटेल)
संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
ब्रेकिंग न्यूज़: कोषालय अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोप!
कोषालयीन लिपिकों के अधिकारों का हनन, वित्त विभाग के निर्देशों की सरेआम ‘धज्जियां’
उजाला टुडे कोंडागांव 9 दिसम्बर 2025- केशकाल, छत्तीसगढ़। प्रदेश के कई ज़िला और उप-कोषालयों में कार्यरत लिपिकीय कर्मचारियों के अधिकारों के हनन और वित्त विभाग के स्पष्ट निर्देशों के उल्लंघन का गंभीर मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कोषालयीन शासकीय कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया है कि कोषालय अधिकारी मनमाने ढंग से डाटा एंट्री ऑपरेटर्स से लिपिकीय कार्य करा रहे हैं, जबकि लिपिकों को उनके मुख्य कार्यों से अलग किया जा रहा है।
प्रमुख आरोप एवं चिंताएं
छत्तीसगढ़ प्रदेश कोषालयीन शासकीय कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष (बस्तर) भानू पटेल ने इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और विशेष सचिव, वित्त विभाग, एवं संचालक, कोष एवं लेखा को पत्र प्रेषित किया है। उनके अनुसार, यह कार्यप्रणाली कोषालय संहिता के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, जिससे कोषालयीन लिपिकों में भारी रोष व्याप्त है।
- लिपिकीय कार्यों पर डाटा एंट्री आपरेटरो का कब्ज़ा: संघ का आरोप है कि जिला कोषालय रायपुर, इन्द्रावती कोषालय नया रायपुर, जिला कोषालय कवर्धा, जिला कोषालय जगदलपुर, और प्रदेश के अन्य कई कोषालयों में डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को लिपिकीय कार्य आवंटित किए गए हैं।
- नियमों की अनदेखी: वित्त विभाग के पत्र (दिनांक 01.11.2024) के अनुसार, लिपिकों का कार्य मुख्य रूप से नस्तियों का प्रस्तुतीकरण, संधारण, पत्राचार और नियमों के अनुरूप कार्य करना होता है, जबकि डाटा एंट्री आपरेटर का कार्य केवल तकनीकी स्वरूप का (डाटा एंट्री, विश्लेषण) होता है। कोषालय अधिकारी इस नियम की अनदेखी कर रहे हैं।
- महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार: डाटा एंट्री आपरेटर को देयक पारित शाखा, सीपीएस/ओपीएस शाखा, पेंशन शाखा, ई-पेमेंट कार्य और यहाँ तक कि भण्डार शाखा का कार्य भी आवंटित किया गया है।
- लेखा प्रशिक्षण की कमी: भानू पटेल ने बताया कि डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को नियमों का ज्ञान नहीं होता है और न ही वे लेखा प्रशिक्षित होते हैं। इसके बावजूद, वे कोषालय अधिकारियों के साथ मिलकर कोषालय का संचालन कर रहे हैं।
वित्त विभाग के निर्देशों का खुला उल्लंघन
संघ ने वित्त विभाग के दो महत्वपूर्ण निर्देशों के उल्लंघन पर विशेष रूप से ज़ोर दिया है:
- सहायक कोषालय अधिकारियों की अनदेखी: आरोप है कि कोषालय अधिकारियों द्वारा पारित देयकों को भी डाटा एंट्री आपरेटरो द्वारा सीधे पारित कर दिया जाता है, वह भी सहायक कोषालय अधिकारियों के परीक्षण के बिना। यह कोषालय संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।
- ई-पेमेंट कार्य का गलत आवंटन: वित्त विभाग के पत्र (दिनांक 07.06.2024) की कंडिका 05 में स्पष्ट उल्लेख है कि ई-पेमेंट कार्य सहायक कोषालय अधिकारी को सौंपा जाना चाहिए। कोषालय अधिकारियों द्वारा यह कार्य भी डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को देकर आदेश की खुलेआम अवहेलना की जा रही है।
आंदोलन की चेतावनी
संभागीय अध्यक्ष भानू पटेल ने चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर मामले में तत्काल और उचित कार्यवाही नहीं की गई, और लिपिकों के अधिकार बहाल नहीं किए गए, तो प्रदेश के समस्त कोषालयीन कर्मचारी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
यह मामला प्रदेश के वित्तीय प्रशासन की पारदर्शिता और नियम-पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिस पर राज्य के वित्त विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया अपेक्षित है।

