संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
छत्तीसगढ़ बंद का कोंडागांव में व्यापक असर: सर्व समाज के आह्वान पर व्यापारियों ने स्वेच्छा से बंद रखीं दुकानें
उजाला टुडे कोंडागांव 24 दिसम्बर 2025- कोंडागांव: छत्तीसगढ़ में बढ़ती सामाजिक अशांति, जनजातीय आस्थाओं पर चोट और धर्मांतरण के विरोध में ‘सर्व समाज छत्तीसगढ़’ द्वारा आज 24 दिसंबर 2025 को बुलाए गए ‘प्रदेशव्यापी बंद’ का कोंडागांव में ऐतिहासिक और व्यापक असर देखने को मिला। नगर के व्यापारियों ने इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए सुबह से ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखे, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा।
प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन का शंखनाद
सर्व समाज द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह बंद मुख्य रूप से कांकेर जिले के आमाबेड़ा में हुई हालिया घटनाओं और प्रदेश में बढ़ते धर्मांतरण के खिलाफ आयोजित किया गया था। समाज का आरोप है कि मिशनरियों द्वारा सुनियोजित तरीके से सामाजिक विद्वेष फैलाया जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
कोंडागांव में एकजुटता का प्रदर्शन
कोंडागांव के हृदय स्थल से लेकर गलियों तक बंद का असर साफ दिखाई दिया। बस स्टैंड, मुख्य मार्ग और दैनिक बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। स्थानीय व्यापारी संघों ने स्वेच्छा से आगे आकर बंद का समर्थन किया। बंद को सफल बनाने के लिए सर्व समाज के कार्यकर्ता सुबह से ही सड़कों पर सक्रिय दिखे, हालांकि पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहा।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें:
- धर्म स्वातंत्र्य विधेयक: राज्य में कड़ा धर्मांतरण विरोधी कानून तत्काल प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
- दोषियों पर कार्रवाई: आमाबेड़ा की घटना में शामिल आरोपियों और बाहरी संगठनों के विरुद्ध कठोरतम धाराओं में कार्रवाई हो।
- अधिकारियों का निलंबन: पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों (एसडीएम और तहसीलदार) को तत्काल निलंबित किया जाए।
- मुआवजा और न्याय: निर्दोष ग्रामीणों पर दर्ज पुलिस केस वापस लिए जाएं और हिंसा पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाए।
प्रशासनिक सतर्कता
बंद के मद्देनजर जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरे शहर में मुस्तैद रहा। संवेदनशील चौक-चौराहों पर पुलिस की तैनाती की गई थी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। सर्व समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेता है, तो आने वाले समय में आंदोलन को और भी उग्र और व्यापक बनाया जाएगा।
”यह आंदोलन किसी धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों और जनजातीय अस्मिता की रक्षा के लिए है। कोंडागांव के व्यापारियों का समर्थन हमारी इस लड़ाई को मजबूती प्रदान करता है।” — प्रवक्ता, सर्व समाज छत्तीसगढ़


