संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
मोदी की ‘गारंटी’ बनाम कर्मचारियों का ‘हल्लाबोल’: कोंडागांव में अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने खोला मोर्चा
उजाला टुडे कोंडागांव 31 दिसम्बर 2025- कोंडागांव: छत्तीसगढ़ में साल के अंतिम दिन सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कोंडागांव में ‘कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन’ के बैनर तले सैकड़ों कर्मियों ने “मोदी की गारंटी” पर सवाल उठाते हुए तीन दिवसीय धरने के बाद एक विशाल रैली निकाली।
आक्रोश की गूँज: “क्या यही है विष्णु का सुशासन?”
रैली के दौरान कर्मचारियों के बीच भारी आक्रोश देखा गया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क है कि चुनाव पूर्व किए गए वादों और “मोदी की गारंटी” को अमलीजामा पहनाने में सरकार विफल रही है। प्रदर्शन स्थल पर गूँजते नारों और तख्तियों पर लिखे सवालों ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कर्मचारियों ने पूछा— “क्या वादों को ठंडे बस्ते में डाल देना ही विष्णु का सुशासन है?”
आंदोलन के मुख्य बिंदु:
- तीन दिवसीय पड़ाव: कर्मचारी पिछले तीन दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे हुए थे।
- भव्य रैली: आज शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए एक विशाल रैली निकाली गई, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व और अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।
- 11 सूत्रीय मांगें: मुख्य मांगों में केंद्र के समान महंगाई भत्ता (DA), सातवें वेतनमान के अनुरूप गृह भाड़ा भत्ता (HRA), और लंबित एरियर का भुगतान शामिल है।
फेडरेशन का कड़ा रुख
फेडरेशन के स्थानीय नेताओं का कहना है कि सरकार कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा ले रही है। “हमने अपनी मांगों को लेकर बार-बार ज्ञापन सौंपा, लेकिन ‘सुशासन’ की आड़ में केवल आश्वासन मिला है। अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह आंदोलन आने वाले समय में और उग्र रूप लेगा।”
प्रशासनिक कामकाज पर असर
साल के आखिरी दिन हुए इस बड़े प्रदर्शन के कारण जिले के कई सरकारी दफ्तरों में काम प्रभावित रहा। आम जनता को अपने कार्यों के लिए भटकना पड़ा, जिससे शासन के प्रति असंतोष की स्थिति देखी गई।



