किसान के बेटे ने पेश की मिसाल: संजू मरकाम का सीमा सुरक्षा बल (BSF) में चयन, जिले का बढ़ाया मान
उजाला टुडे कोंडागांव कोण्डागांव, 21 जनवरी 2026 कोंडागांव: जिले के ग्राम खड़का के एक साधारण किसान परिवार के बेटे, संजू मरकाम ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से सफलता की एक नई इबारत लिखी है। संजू का चयन वर्ष 2024-25 की एसएससी जीडी (SSC GD) परीक्षा के माध्यम से सीमा सुरक्षा बल (BSF) में हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके गांव में खुशी की लहर है, बल्कि पूरे जिले का नाम गौरवान्वित हुआ है।
कठिन परिश्रम और शिक्षा का संगम
संजू मरकाम एक ऐसे परिवार से आते हैं जहाँ माता-पिता शिक्षित नहीं हैं, लेकिन उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझते हुए संजू को ऊंचाइयों तक पहुँचने में पूरा सहयोग दिया। संजू ने अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री (MA) हासिल की है। खास बात यह है कि अपनी पढ़ाई के साथ-साथ वे बचपन से ही खेतों में अपने पिता का हाथ बंटाते रहे, लेकिन उन्होंने कभी अपने लक्ष्य को आंखों से ओझल नहीं होने दिया।
‘वर्दी’ का सपना और लक्ष्य कोचिंग का साथ
बचपन से ही वर्दी के प्रति आकर्षित रहने वाले संजू अपनी सफलता का बड़ा श्रेय जिला प्रशासन द्वारा संचालित निःशुल्क ‘लक्ष्य’ कोचिंग संस्थान को देते हैं।
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- प्रथम बैच के छात्र: संजू इस संस्थान के पहले बैच के छात्र रहे, जहाँ उन्होंने प्रवेश परीक्षा में 19वां स्थान प्राप्त किया था।
- स्थानीय सुविधा का लाभ: संजू का कहना है कि पहले ऐसी तैयारी के लिए रायपुर या बिलासपुर जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब जिले में ही मिल रही निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा युवाओं के लिए वरदान साबित हो रही है।
”बचपन से जब भी किसी वर्दीधारी को देखता था, तो मन में देशसेवा का जज्बा पैदा होता था। आज माता-पिता के आशीर्वाद और लक्ष्य कोचिंग के मार्गदर्शन से वह सपना हकीकत बन गया है।”
— संजू मरकाम
अनुशासन और परिवार का समर्थन
संजू ने बताया कि उनकी सफलता में उनके बड़े भाई और दीदी का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने उन्हें समय प्रबंधन और नियमित शारीरिक अभ्यास (दौड़) के लिए प्रेरित किया। प्रतिदिन सुबह की कड़ी मेहनत और कोचिंग में शिक्षकों के सरल मार्गदर्शन ने उनके मार्ग को प्रशस्त किया।
संजू की यह कहानी कोण्डागांव के उन सैकड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अभावों के बीच बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। जिला प्रशासन की इस पहल और संजू की लगन ने साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण अंचल की प्रतिभाएं भी आसमान छू सकती हैं।



