संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
बस्तर के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद गैंद सिंह की 201वीं पुण्यतिथि मनाई गई
बाबा साहेब सेवा संस्था ने दीप प्रज्वलित कर दी श्रद्धांजलि, परलकोट विद्रोह के नायक की वीरगाथा को किया याद
उजाला टुडे कोंडागांव 21 जनवरी 2026:कोंडागांव:परलकोट विद्रोह के महानायक और बस्तर की माटी के वीर सपूत शहीद गैंद सिंह की 201वीं पुण्यतिथि बाबा साहेब सेवा संस्था द्वारा गौरवपूर्ण तरीके से मनाई गई। संस्था के कार्यालय में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में अतिथियों ने शहीद गैंद सिंह के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर उन्हें नमन किया और उनके ऐतिहासिक बलिदान पर प्रकाश डाला।
इतिहास का वह अनसुना अध्याय: 1824 का विद्रोह
श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने बताया कि शहीद गैंद सिंह छत्तीसगढ़ की धरती पर अंग्रेजों के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले पहले क्रांतिकारी थे। सन् 1818 में नागपुर के भोंसले शासन और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई संधि के बाद बस्तर क्षेत्र शोषण का शिकार होने लगा था। मराठा कर्मचारियों और अंग्रेज अधिकारियों द्वारा आदिवासियों के संसाधनों की लूट और भारी करों के खिलाफ गैंद सिंह ने परलकोट (अबूझमाड़ क्षेत्र) से विद्रोह का नेतृत्व किया।
छापामार युद्ध और धौरा वृक्ष की टहनियों का संदेश
इतिहासकारों के अनुसार, गैंद सिंह ने हजारों आदिवासियों को एकजुट किया। इस विद्रोह की खास बात यह थी कि पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी शस्त्र उठाए थे। विद्रोह का संदेश पहुँचाने के लिए ‘धौरा पेड़ की टहनियों’ का उपयोग किया जाता था। आदिवासियों ने घोटुल में रणनीतियां बनाईं और छापामार युद्ध के जरिए अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया।
शहादत को किया गया याद
लगभग एक वर्ष तक चले इस स्वाधीनता संग्राम को दबाने के लिए अंग्रेजों ने चांदा (चंद्रपुर) से बड़ी सेना बुलवाई। 10 जनवरी 1825 को परलकोट को घेर लिया गया और अंततः 20 जनवरी 1825 को वीर गैंद सिंह को उनके ही महल के सामने फांसी दे दी गई। यह सन् 1857 की क्रांति से भी कई साल पहले छत्तीसगढ़ की भूमि पर दिया गया पहला महान बलिदान था।
उपस्थित गणमान्य
कार्यक्रम में वक्ताओं ने दुख व्यक्त किया कि शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण इतिहास के इस महानायक को वह स्थान नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार थे। इस अवसर पर संस्था के संरक्षक तिलक पांडे, प्रमोद भारती, अध्यक्ष भवन लाल मार्कंडेय, मुकेश मार्कंडेय, सिद्धार्थ महाजन, सत्येंद्र भोयर, देवेंद्र कुमार देहारी सहित संस्था के अन्य पदाधिकारी और समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

