संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
नजरिया बदला तो नजर बदली: हाई स्कुल हात्मा के छात्रों ने ‘दो आँखों के विज्ञान’ से सुलझाया गहराई का रहस्य
उजाला टुडे कोंडागांव 28 जनवरी 2026- कोंडागाँव बडेराजपुर : अक्सर हम जिसे साधारण समझते हैं, उसके पीछे का विज्ञान बड़ा ही दिलचस्प होता है। शासकीय हाई स्कूल हात्मा विकासखण्ड बडेराजपुर में आज कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जहाँ किताबी ज्ञान को धरातल पर उतारते हुए छात्रों ने “द्विनेत्री दृष्टि” (Binocular Vision) का एक अनूठा और सफल प्रयोग कर दिखाया।
चार टुकड़े और एक नई सोच
स्कूल परिसर में छात्रों ने जमीन पर रखे एक हाथी के चित्र (जो चार अलग-अलग टुकड़ों में था) के माध्यम से यह समझने की कोशिश की कि हमारी दृष्टि कैसे काम करती है।
प्रयोग के दौरान छात्रों ने अनुभव किया कि एक आँख बंद करके देखने पर दृश्य सपाट नजर आता है, जिससे वस्तुओं की दूरी और उनकी गहराई का सही अंदाजा लगाना कठिन हो जाता है।
जैसे ही उन्होंने दोनों आँखों का उपयोग किया, ‘हाथी के टुकड़ों’ की सापेक्ष दूरी और उनका 3D आकार स्पष्ट हो गया।
शिक्षक की जुबानी: क्या है ‘स्टीरियोप्सिस’?
विज्ञान शिक्षक संदीप सेन ने इस जिज्ञासा को वैज्ञानिक आधार देते हुए बताया:
”हमारी दोनों आँखें किसी भी वस्तु को अलग-अलग कोणों से देखती हैं। हमारा मस्तिष्क इन दो अलग-अलग छवियों को प्रोसेस कर एक त्रि-आयामी (3D) तस्वीर तैयार करता है। विज्ञान की भाषा में इसे ‘स्टीरियोप्सिस’ कहते हैं। यही कारण है कि हम दुनिया को गहराई के साथ देख पाते हैं।”
विज्ञान से जीवन के दर्शन तक
यह प्रयोग सिर्फ प्रयोगशाला के नियमों तक सीमित नहीं रहा। छात्रों ने इससे एक बड़ा जीवन मंत्र भी सीखा। एक छात्र ने बड़ी ही परिपक्वता के साथ कहा कि जिस तरह दो आँखें मिलकर बेहतर विजन देती हैं,
वैसे ही जीवन की समस्याओं को भी अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखना चाहिए ताकि सही समझ विकसित हो सके।
प्रधानाचार्य ने थपथपाई पीठ
स्कूल के प्रधानाचार्य ने छात्रों और शिक्षकों के इस समन्वित प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के व्यावहारिक प्रयोग रटने की पद्धति को खत्म कर बच्चों में वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा पैदा करते हैं।




