संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कागजों पर सिमटी वनों की सुरक्षा; कोंडागांव में कुल्हाड़ी की भेंट चढ़ रहे बेशकीमती ‘साल’ के जंगल
उजाला टुडे कोंडागांव 19 फरवरी 2026-कोंडागांव: एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर कोंडागांव वनमंडल से संरक्षण के दावों की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है। मुलमुला वन परिक्षेत्र के डोंगरसिलाटी में बड़े पैमाने पर साल वनों की अंधाधुंध कटाई ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जल संरक्षण के गड्ढे बने कटाई का गवाह
हैरानी की बात यह है कि जिस वन कक्ष क्रमांक 284 में पेड़ों का कत्लेआम हुआ है, वहां महज साल भर पहले ही विभाग ने जल संरक्षण के नाम पर लाखों खर्च कर गड्ढे खुदवाए थे और सीपीटी (कंटूर ट्रेंच) नाली का निर्माण कराया था। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन को सुरक्षित करने के लिए घेराबंदी की गई थी, आज उसी जमीन पर खड़े सैकड़ों पेड़ गायब हो चुके हैं।
ग्रामीणों का सीधा आरोप: ‘बिना साठगांठ मुमकिन नहीं’
स्थानीय ग्रामीणों ने विभाग के मैदानी अमले पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि:
- इतने बड़े पैमाने पर (लगभग 4-5 हेक्टेयर) जंगलों की कटाई बिना विभागीय कर्मचारियों की शह और मिलीभगत के संभव नहीं है।
- दिन-दहाड़े हो रही कटाई पर बीट गार्ड से लेकर उच्च अधिकारियों तक की चुप्पी मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
- विभाग केवल कागजी कार्यवाही का कोरम पूरा कर रहा है, जबकि धरातल पर जंगल उजाड़ दिए गए हैं।
सवालों के घेरे में जिम्मेदार: बयान देने से बच रहे अधिकारी
जब इस मामले में मुलमुला परिक्षेत्र अधिकारी और संबंधित फॉरेस्ट गार्ड से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो जिम्मेदार अधिकारी कैमरे और सवालों से बचते नजर आए। हालांकि, दबी जुबान में अधिकारी यह स्वीकार कर रहे हैं कि प्रकरण दर्ज किया गया है, लेकिन:
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- अब तक कितने पेड़ों की बलि चढ़ी, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
- कटाई करने वाले और अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देने वाले कर्मचारियों पर क्या ठोस कार्रवाई हुई, इस पर विभाग मौन है।
: वनों की कटाई और फिर उस जमीन पर अतिक्रमण का यह खेल कोंडागांव में नया नहीं है। लेकिन डोंगरसिलाटी की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि रक्षक ही जब भक्षक की भूमिका में संदिग्ध हों, तो वनों को बचाना केवल एक किताबी लक्ष्य बनकर रह जाता है।

