संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन का अल्टीमेटम: “बजट में मांगें पूरी हों, वरना होगा आर-पार का आंदोलन”
उजाला टुडे कोंडागांव 24 फरवरी 2026- रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच अब धैर्य का बांध टूटता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब सरकार की ‘तेल मालिश’ या मीठी बातों में आने वाले नहीं हैं। फेडरेशन ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है और आगामी बजट सत्र को अपनी मांगों के लिए “अंतिम अवसर” के रूप में देख रहे हैं।
प्रमुख मांगें जिन पर टिकी है नजर:
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा और संरक्षक सुभाष मिश्र के नेतृत्व में जारी प्रेस नोट के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- DA और DR: केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता और महंगाई राहत।
- एरियर्स का भुगतान: वर्ष 2019 से लंबित DA एरियर्स की राशि को GPF खाते में समायोजित करना।
- पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट: लिपिकों, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों की वेतन विसंगति पर रिपोर्ट सार्वजनिक करना।
- नियमितीकरण: दैनिक वेतन भोगी, अनियमित और संविदा कर्मचारियों को नियमित पदस्थापना देना।
- अन्य मांगें: 300 दिनों का अर्जित अवकाश नकदीकरण, कैशलेस सुविधा और सेवानिवृत्ति आयु को 65 वर्ष करना।
“अब केवल दबाव, दिखावा नहीं”
कर्मचारी संगठनों के भीतर से उठ रही आवाजों का कहना है कि अब पदाधिकारियों को सरकार पर विशेष दबाव डालना होगा। सोशल मीडिया और कर्मचारी ग्रुप्स में यह चर्चा तेज है कि यदि इस बजट सत्र में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो फेडरेशन को केवल “लोकतांत्रिक तरीके” की बात छोड़कर ‘आर-पार’ की लड़ाई लड़नी होगी।
”कर्मचारी वर्ग शासन की रीढ़ है। यदि बजट में हमारी मांगों को शामिल कर प्राथमिकता नहीं दी गई, तो हम उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।” – कमल वर्मा, प्रांतीय संयोजक
निष्कर्ष:
प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की निगाहें अब छत्तीसगढ़ सरकार के आगामी बजट पर टिकी हैं। कर्मचारियों का साफ संदेश है कि “मोदी की गारंटी” को अब जमीन पर उतारने का वक्त आ गया है। यदि बजट में ठोस निर्णय नहीं लिए जाते, तो प्रदेश में सरकारी कामकाज ठप होने जैसी स्थिति बन सकती है।
