संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव में बेखौफ ‘काष्ठ तस्कर’: वन विभाग की नाक के नीचे से पार हो रहीं लकड़ियां, सिस्टम पर उठे सवाल
उजाला टुडे कोंडागांव 26 फरवरी 2026- कोंडागांव। बस्तर की हरी-भरी वादियों और बेशकीमती वन संपदा पर इन दिनों लकड़ी तस्करों की काली नजर लग गई है। कोंडागांव जिले में पेड़ों की अवैध कटाई और तस्करी का एक ऐसा संगठित खेल चल रहा है, जिसने प्रशासनिक मुस्तैदी के दावों की पोल खोलकर रख दी है। आलम यह है कि जिले की सीमाओं पर वन विभाग के चेक पोस्ट होने के बावजूद, तस्कर भारी वाहनों में लकड़ियां भरकर आसानी से रफूचक्कर हो रहे हैं।
चेक पोस्ट बने ‘शोपीस’, सिंडिकेट के हौसले बुलंद
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में एक मजबूत लकड़ी तस्कर सिंडिकेट सक्रिय है। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध कारोबार को किसी छिपकर नहीं, बल्कि खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जब जिले के प्रवेश और निकास द्वारों पर वन विभाग की तैनाती है, तो 12 चक्का जैसे बड़े मालवाहक ट्रक बिना किसी रोक-टोक के कैसे गुजर रहे हैं? क्या यह विभाग की लापरवाही है या मिलीभगत?
ताजा मामला: नयापारा ओंडारगांव में ट्रक जब्त
तस्करी का ताजा प्रमाण अमरावती वन परिक्षेत्र में देखने को मिला। ग्रामीणों की सूचना के अनुसार, मालगांव निवासी नरेंद्र मरकाम द्वारा प्राथमिक शाला नयापारा ओंडारगांव के ठीक सामने एक 12 चक्का ट्रक (क्रमांक MH 35 K 3710) में अवैध रूप से काटी गई भारी मात्रा में लकड़ी लादी जा रही थी।
ग्रामीणों के विरोध और सूचना के बाद DFO कोंडागांव, चूड़ामणि सिंह ने मामले को संज्ञान में लिया और वन विभाग की टीम को मौके पर रवाना किया। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई अब तक अपवाद ही रही है।
सियासी संरक्षण की चर्चा और प्रशासनिक सुस्ती
क्षेत्र में चर्चा है कि इस पूरे खेल को कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण तस्करों के भीतर कानून का खौफ खत्म हो चुका है। बेतरतीब ढंग से हो रही पेड़ों की कटाई से न केवल पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है, बल्कि शासन को भी लाखों के राजस्व का चूना लग रहा है।
”ग्रामीणों की सजगता से मामला सामने आया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग केवल एक ट्रक पकड़कर शांत हो जाएगा, या इस सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचकर मास्टरमाइंड पर कार्रवाई करेगा?”
अगली कार्रवाई पर टिकी नजरें
अब देखना यह होगा कि इस ताजा खुलासे के बाद वन विभाग कितनी सख्ती बरतता है। क्या चेक पोस्टों पर तैनात कर्मियों की जवाबदेही तय होगी? क्या कोंडागांव के जंगलों को उजड़ने से बचाया जा सकेगा?

