संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
“जादू नहीं, विज्ञान है”: हात्मा हाई स्कूल में उमड़ा नवाचार का सैलाब, कबाड़ से रचा गया विज्ञान का संसार
उजाला टुडे कोंडागांव 28 फरवरी 2026- कोंडागांव :बड़ेराजपुर (हात्मा) अंधविश्वास की बेड़ियों को तोड़कर तार्किक सोच विकसित करने के उद्देश्य से शासकीय हाई स्कूल हात्मा में ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे विज्ञान शिक्षक संदीप सेन ने “जादू नहीं, विज्ञान है” के नारे के साथ छात्रों को चमत्कारों के पीछे छिपे वैज्ञानिक रहस्यों से अवगत कराया।
कबाड़ से कमाल: 33 प्रयोगों ने किया मंत्रमुग्ध
विद्यार्थियों ने घर और स्कूल के बेकार सामान का उपयोग कर 33 से अधिक क्रियाशील मॉडल तैयार किए। इन प्रयोगों ने जटिल सिद्धांतों को बेहद सरल बना दिया:
- वायुमंडलीय दबाव: स्ट्रॉ और खाली बोतलों के माध्यम से हवा की शक्ति का प्रदर्शन।
- सतह तनाव और घनत्व: सुई को पानी पर तैराकर तरल पदार्थों के गुणों की व्याख्या।
- प्रकाश विज्ञान: कांच के टुकड़ों और लेंस से इंद्रधनुष बनने की प्रक्रिया का सजीव चित्रण।
- फेफड़ा मॉडल: गुब्बारों और पुरानी बोतलों की मदद से श्वसन तंत्र की कार्यप्रणाली को समझाया गया।
प्रकृति बनी प्रयोगशाला: 44 औषधीय पौधों की प्रदर्शनी
विज्ञान सिर्फ यंत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे प्रकृति से भी जोड़ा गया। छात्रों ने 44 स्थानीय औषधीय पौधों की प्रदर्शनी लगाई। प्रत्येक पौधे के वैज्ञानिक नाम और उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देकर बच्चों ने सिद्ध किया कि प्रकृति हमारी सबसे बड़ी प्रयोगशाला है।
”जब हम किसी चमत्कार को बिना सोचे-समझे मान लेते हैं, तो वह जादू है; लेकिन जब हम उसके पीछे का ‘क्यों’ और ‘कैसे’ ढूंढते हैं, तो वही विज्ञान है।”— संदीप सेन, विज्ञान शिक्षक
प्रतिभा और तार्किकता का संगम
मेले के दौरान छात्रों की तार्किक क्षमता परखने के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं:
- दिमागी खेल (Mind Games): पहेलियों और क्विज के जरिए मानसिक कसरत।
- चित्रकला और निबंध: ‘भविष्य का विज्ञान’ विषय पर कल्पनाओं के रंग बिखेरे गए।
- ओजस्वी भाषण: बच्चों ने अंधविश्वास के खिलाफ वैज्ञानिक सोच अपनाने की पुरजोर अपील की।
सामुदायिक प्रभाव
विद्यालय के प्राचार्य और समस्त स्टाफ के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल छात्रों के किताबी ज्ञान को व्यवहारिक बनाया, बल्कि स्थानीय समुदाय को भी विज्ञान की उपयोगिता से परिचित कराया। विद्यार्थियों ने संवहन धारा (Convection Current) और वायुमापी (Anemometer) जैसे यंत्रों के माध्यम से मौसम और ऊष्मा के विज्ञान को भी बखूबी प्रदर्शित किया।
