संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
⚖️ कोंडागांव: नाबालिग छात्रों के प्रदर्शन पर कोर्ट सख्त, प्रशासन और स्कूल प्रबंधन से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
उजाला टुडे कोंडागांव 28 नवम्बर 2025- कोंडागांव: जिले में उस समय एक बड़ा और गंभीर मुद्दा सामने आया जब आत्मानंद स्कूल (महात्मा गांधी स्कूल) के नाबालिग छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर अचानक सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन करने लगे। पिछले तीन दिनों से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन पर अब प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश किरण चतुर्वेदी ने स्वतः संज्ञान लिया है, जिससे जिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।
न्यायालय ने इसे बच्चों के अधिकार और सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मामला मानते हुए जिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट सोमवार तक हर हाल में तलब की है।
प्रदर्शन की वजह: भवन निर्माण का विरोध
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आत्मानंद स्कूल के छात्र स्कूल के खेल मैदान में हो रहे न्यायालय भवन निर्माण का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस निर्माण से उनका खेल का मैदान छिन जाएगा, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद ज़रूरी है।
बच्चों ने अपनी पढ़ाई छोड़कर कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने चक्काजाम किया था, जिसकी खबरें स्थानीय समाचार पत्रों और वेब पोर्टल्स में प्रमुखता से प्रकाशित हुईं।
🏛️ जिला न्यायालय ने क्यों लिया संज्ञान?
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश किरण चतुर्वेदी, जो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष भी हैं, ने मीडिया में प्रकाशित ख़बरों को गंभीरता से लिया।
न्यायालय ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर जवाब मांगा है:
- सड़क पर क्यों उतरे नाबालिग? अदालत ने पूछा है कि स्कूल समय में नाबालिग छात्र अचानक अपनी पढ़ाई छोड़कर सड़क पर प्रदर्शन करने के लिए क्यों मजबूर हुए।
- बच्चों की सुरक्षा और अधिकार: न्यायालय ने इसे नाबालिगों की सुरक्षा और उनके मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना है, क्योंकि सड़क पर प्रदर्शन करना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है।
- भूमि संबंधी दस्तावेज़: न्यायालय ने प्रशासन से विवादित स्थल से जुड़े पिछले 15 वर्षों के सभी भूमि अभिलेख भी माँगे हैं। इसमें ज़मीन के आवंटन की स्थिति और स्कूल की वैधानिक स्थिति से जुड़े दस्तावेज़ शामिल हैं।
अब आगे क्या?
न्यायालय द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण त्वरित जांच में जुट गया है। अब पूरे जिले की निगाहें जिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन पर टिकी हैं, जिन्हें सोमवार तक अदालत के सामने सभी दस्तावेज़ों के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी है।
अदालत द्वारा माँगी गई इस रिपोर्ट से ही साफ होगा कि मासूम छात्रों को आंदोलन की राह पर क्यों उतरना पड़ा और इस विवाद का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

