संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
न्याय न मिलने पर हताश आदिवासी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र: ‘आत्महत्या कर लूं या प्रताड़ित करने वालों की हत्या शुरू कर दूं?’
उजाला टुडे कोंडागांव 14 अक्टूबर 2025- कोण्डागांव जिले में पुलिस और राजस्व प्रशासन से कथित तौर पर न्याय न मिलने से हताश एक आदिवासी युवक ने आज महामहिम राष्ट्रपति को एक बेहद मार्मिक और गंभीर पत्र लिखा है। आदिवासी युवक रामचंद मरकाम ने राष्ट्रपति से सीधे यह सलाह मांगी है कि न्याय के अभाव में वह अपने परिजनों के साथ आत्महत्या कर ले, या फिर उसे प्रताड़ित करने वाले गैर-आदिवासियों और उनका साथ देने वाले लोक सेवकों की हत्या करना शुरू कर दे।
यह चौंकाने वाला पत्र आज 14 अक्टूबर को आवेदक रामचंद मरकाम द्वारा कोण्डागांव जिला कलेक्टर के जनदर्शन कार्यक्रम में राष्ट्रपति को सम्बोधित करते हुए प्रस्तुत किया गया है।
01 वर्ष 08 माह से एफआईआर नहीं, गैर-आदिवासी को तत्काल राहत
आवेदक रामचंद मरकाम ने पत्र में कोण्डागांव पुलिस प्रशासन के दोहरे मापदंडों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने बताया कि:
- 01 वर्ष 08 माह से न्याय नहीं: उसके द्वारा आदिवासी प्रताड़ना के आरोपियों के विरुद्ध पुख्ता साक्ष्यों के साथ एफआईआर दर्ज करने के लिए दिए गए आवेदन पर आज तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
- तत्काल गिरफ्तारी: वहीं, गैर-आदिवासी व्यक्तियों द्वारा झूठी शिकायत करने पर, पुलिस ने उसके विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज की और उसे जेल तक भेज दिया गया।
आवेदक ने आरोप लगाया कि गैर-आदिवासी पुलिस अधिकारी, आदिवासी प्रताड़ना के मामलों में स्वयं विवेचना अधिकारी और न्यायाधीश बनकर उसकी शिकायत को अप्रमाणित बता रहे हैं, जबकि संविधान उन्हें यह अधिकार नहीं देता।
“संविधान पर से भरोसा खत्म हो रहा है”
आदिवासी युवक ने पत्र में लिखा है कि पुलिस और राजस्व प्रशासन में पदस्थ गैर-आदिवासी लोक सेवकों और यहाँ तक कि कुछ आदिवासी लोक सेवकों के ऐसे “संविधान से परे कार्य” करने के कारण उसका संविधान पर से भरोसा खत्म हो गया है।
रामचंद मरकाम ने बताया कि वह इस मामले को कलेक्टर कोण्डागांव, पुलिस अधीक्षक, पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्री तथा अनुसूचित जनजाति आयोग तक कई बार पहुंचा चुका है, लेकिन हर जगह मामले को नजरअंदाज कर या दबा दिया गया है। इस कारण वह मानसिक रूप से अत्यधिक प्रताड़ित है।
राष्ट्रपति से मांगी अंतिम सलाह
न्यायिक प्रक्रिया से पूरी तरह निराश हो चुके रामचंद मरकाम ने सीधे राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करते हुए पूछा है:
”क्या मैं अपने परिजनों के साथ आत्म हत्या कर लूं अथवा हथियार उठाकर मुझ आदिवासी को मानसिक एवं आर्थिक रुप से प्रताड़ित कर रहे गैर आदिवासी और उसका साथ दे रहे लोक सेवकों की हत्या करना शुरू कर दूं?”
रामचंद मरकाम ने राष्ट्रपति को शपथपूर्वक आश्वासन दिया है कि वह राष्ट्रपति के पत्र की प्रतीक्षा में है और पत्र प्राप्त होने तक किसी भी तरह का आत्मघाती या असंविधानिक कदम नहीं उठाएगा। इस पत्र ने आदिवासी बहुल बस्तर संभाग के मूल निवासियों के हालात को लेकर प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

