संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोण्डागांव के रॉट आयरन और ढोकरा शिल्प को अब मिलेगा वैश्विक मंच: जयपुर की IICD टीम ने परखी शिल्पकारों की कला
उजाला टुडे कोंडागांव 03 मई 2026-कोण्डागांव: छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले की पारंपरिक हस्तशिल्प कला अब सात समंदर पार अपनी चमक बिखेरने को तैयार है। राजस्थान की प्रतिष्ठित संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट्स एंड डिजाइन (IICD), जयपुर के विशेषज्ञों ने जिले के ग्रामीण अंचलों का दौरा कर स्थानीय शिल्पकारों के हुनर को बारीकी से समझा। इस पहल का उद्देश्य बस्तर की प्राचीन कला को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार ढालकर शिल्पकारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है।
गांव-गांव पहुंची विशेषज्ञों की टीम
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से पहुंची इस टीम ने ग्राम करनपुर में ढोकरा शिल्प की जटिल ‘लॉस्ट वैक्स’ प्रक्रिया और ग्राम छोटेराजपुर एवं कुसमा में रॉट आयरन (लोह शिल्प) की कला का अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने माना कि यहां के शिल्पकारों में अद्भुत सृजनात्मकता है, जिसे यदि सही ब्रांडिंग और फिनिशिंग मिले, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी भारी मांग निकल सकती है।
प्रशिक्षण के लिए जयपुर जाएंगे बस्तर के शिल्पकार
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि IICD जयपुर ने स्थानीय शिल्पकारों को राजस्थान आमंत्रित किया है। वहां उन्हें निम्नलिखित विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा:
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- डिजाइन नवाचार: पारंपरिक कला को आधुनिक रूप देना।
- ई-कॉमर्स: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (Amazon, Flipkart आदि) पर उत्पाद बेचना।
- ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग: उत्पादों को आकर्षक और सुरक्षित तरीके से पैक करना।
”कोण्डागांव के उत्पादों में गजब की मौलिकता है। यदि इन्हें आधुनिक फिनिशिंग और प्रभावी मार्केटिंग का साथ मिले, तो शिल्पकारों की आय में कई गुना वृद्धि संभव है।”
— विशेषज्ञ, IICD जयपुर
‘मोर सुआद’ के पारंपरिक जायके ने जीता दिल
दौरे के दौरान जयपुर की टीम ने छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के केंद्र ‘मोर सुआद’ का भी आनंद लिया। लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार पारंपरिक व्यंजनों की सराहना करते हुए विशेषज्ञों ने उनके नवाचार को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
प्रशासनिक तालमेल से बढ़ेंगे अवसर
जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई के मार्गदर्शन और जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुंजलाल सिन्हा के समन्वय में आयोजित इस दौरे में सहायक राज्य कार्यक्रम प्रबंधक मनोज मिश्रा सहित ब्लॉक स्तर के अधिकारी भी शामिल रहे। प्रशासन का लक्ष्य है कि शिल्पकारों को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे बड़े बाजारों से जोड़ा जाए।


