
पहली ही बारिश में खुली पोल: 1.15 करोड़ की लागत से बना स्वास्थ्य केंद्र ‘बीमार’, छत से टपक रहा पानी
उजाला टुडे कोंडागांव 05 मई 2026- कोंडागांव: छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा कोंडागांव में निर्मित नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मीटिंग हॉल भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। अभी पिछले साल 14 सितंबर 2025 को ही इस भवन का लोकार्पण बड़े तामझाम के साथ किया गया था, लेकिन महज एक घंटे की बारिश ने इसकी मजबूती के दावों की हवा निकाल दी है।
करोड़ों का बजट, पर कागजी निकली मजबूती
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) द्वारा निर्मित इस भवन की लागत 1.15 करोड़ रुपये है। रिकॉर्ड के मुताबिक, 14 सितंबर 2025 को बड़े तामझाम के साथ इसका उद्घाटन हुआ था। लेकिन 4 मई को हुई महज एक घंटे की बारिश ने ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की पोल खोल दी।
- हालत: छत से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है।
- दिक्कत: सीलिंग में लंबी दरारें साफ देखी जा सकती हैं।
- लापरवाही: छत पर जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से पानी जमा हो रहा है, जो रिसकर अंदर आ रहा है।
मरीजों की जान जोखिम में, मंडरा रहा ‘हादसे’ का साया
अस्पताल जैसी जगह जहाँ मरीज ठीक होने आते हैं, वहां यह जर्जर व्यवस्था किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
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- शॉर्ट सर्किट का खतरा: सीलिंग पंखों और बिजली के बोर्ड्स के पास से पानी टपक रहा है। गीली दीवारों में करंट फैलने का डर बना हुआ है।
- संक्रमण का डर: दीवारों पर आई नमी और जमा हुआ पानी अस्पताल में सीलन पैदा कर रहा है, जिससे मरीजों (खासकर नवजातों और बुजुर्गों) में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।
“लाखों की लागत से बना यह केंद्र जनता की सुविधा के लिए था, लेकिन अब यह स्टाफ और मरीजों के लिए डर का कारण बन गया है।” — स्थानीय नागरिक
जिम्मेदारों की चुप्पी और उठते तीखे सवाल
लोकार्पण पट्टिका पर दर्ज नाम आज सवालों के घेरे में हैं। स्थानीय लोग और मरीजों के परिजनों ने प्रशासन से सीधे सवाल पूछे हैं:
- क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई?
- निर्माण कार्य का सुपरविजन करने वाले अधिकारियों ने इसे ‘ओके’ रिपोर्ट कैसे दी?
- जनता की गाढ़ी कमाई के 1.15 करोड़ रुपये आखिर किसकी जेब में गए?
क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच नहीं की गई थी?
करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जनता को ऐसी जर्जर सुविधा क्यों मिल रही है?
क्या दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
सरकारी अस्पतालों की हालत बद से बदतर होती जा रही है. एक तरफ जहाँ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े वादे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. कोंडागांव उप स्वास्थ्य केंद्र का हाल भी कुछ ऐसा ही है. यहाँ की बिल्डिंग जर्जर हालत में है और छत पर पानी भरा रहता है. निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे पानी छत पर ही जमा रहता है.
निष्कर्ष: जवाबदेही की दरकार
सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का वादा करने वाला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा, यह देखने वाली बात होगी। जरूरत सिर्फ मरम्मत की नहीं, बल्कि उन दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है जिन्होंने जनता की जान और सरकारी खजाने के साथ खिलवाड़ किया है।

