
पुरानी पेंशन पर शिक्षकों की बड़ी जीत बरकरार रखने की तैयारी: सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर
उजाला टुडे कोंडागांव 07 मई 2026- कोण्डागांव/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के शिक्षक एलबी संवर्ग के लिए पुरानी पेंशन (OPS) की राह में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना के पक्ष में दिए गए फैसले को सुरक्षित रखने के लिए छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने सक्रियता दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट (उच्चतम न्यायालय) में कैविएट (Caveat) दायर कर दी है।
सरकार की संभावित चुनौती को देखते हुए एसोसिएशन अलर्ट
शिक्षक एलबी संवर्ग की पुरानी पेंशन के लाभ हेतु प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवाकाल की गणना को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में निर्णय दिया था। इस निर्णय को राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की प्रबल संभावना को देखते हुए, याचिकाकर्ता और जिलाध्यक्ष ऋषिदेव सिंह ने एसोसिएशन के शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में यह कानूनी सुरक्षा कवच तैयार किया है।
बिना पक्ष सुने नहीं होगा कोई एकपक्षीय फैसला
जिलाध्यक्ष ऋषिदेव सिंह ने बताया कि प्रांताध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष बसंत चतुर्वेदी एवं प्रवीण श्रीवास्तव के कुशल मार्गदर्शन में उच्चतम न्यायालय के ‘अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड’ आशुतोष घड़े के माध्यम से 05.05.2025 को कैविएट दर्ज की गई है।
कैविएट का लाभ: अब यदि राज्य सरकार हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करती है, तो माननीय उच्चतम न्यायालय शिक्षकों का पक्ष सुने बिना कोई भी स्थगन (Stay) या विपरीत आदेश जारी नहीं कर सकेगा।
हाई कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु, जिन्होंने शिक्षकों को दी नई उम्मीद:
माननीय न्यायालय ने अपने आदेशों (दिनांक 23/01/2026 से 01/05/2026 के मध्य जारी) में स्पष्ट किया है कि:
- संविलियन पूर्व की सेवा: पूर्व में की गई सेवा को अप्रासंगिक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
- संवैधानिक अधिकार: अनुच्छेद 14 और 16 के तहत सेवा की निरंतरता और प्रशासनिक नियंत्रण का पालन अनिवार्य है।
- पेंशन का हक: पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि एक कल्याणकारी योजना है जिस पर कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है।
- समय सीमा: न्यायालय ने राज्य सरकार को 120 दिनों के भीतर सकारात्मक पहल करने का निर्देश दिया है।
एकजुटता की अपील और ठगों से सावधान रहने के निर्देश
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि कैविएट का संपूर्ण व्यय संगठन द्वारा वहन किया गया है। किसी भी शिक्षक से इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया गया है। पदाधिकारियों ने शिक्षकों को आगाह किया है कि राशि कलेक्शन के नाम पर भ्रम फैलाने वालों से सतर्क रहें।
इन प्रमुख याचिकाकर्ताओं के संघर्ष की जीत
इस कानूनी लड़ाई में ऋषिदेव सिंह के साथ प्रमुख रूप से:
रमेश चंद्रवंशी, शत्रुहन साहू, जयंत यादव, दिलीप साहू, प्रवीण श्रीवास्तव, सुधीर कुमार दुबे, वाजिद खान, देवनाथ साहू, मेघनाथ साहू, आशीष राम, सोन सिंह कश्यप, राजेश यादव, गोपी वर्मा, हेमेंद्र साहसी, राम सिंह मरापी, करण सिंह बघेल, शिव सिंह चंदेल, डॉ. कृष्ण मूर्ति शर्मा, राम लाल डडसेना, दुर्गा गुप्ता, मुकेश कोरी, विक्रम सिंह, गिरधर राम साहू, किशन लाल देशमुख, मनोहर लाल गौतम एवं मदन साटकर सहित सैकड़ों शिक्षकों का योगदान रहा है।
“शिक्षकों के न्यायसंगत अधिकारों और हाई कोर्ट से मिली जीत को बरकरार रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था। हम अंतिम सांस तक पेंशन के हक की लड़ाई लड़ेंगे।”
— ऋषिदेव सिंह, जिलाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन, कोण्डागांव

