
कोंडागांव में सरकारी पैसे का कत्लेआम: 8 साल से सड़ रहीं ‘संजीवनी’, क्या साहबों और बाबूओं की ‘कमीशनखोरी’ ने निगला मरीजों का हक?
उजाला टुडे कोंडागांव 08 मई 2026-कोंडागांव: स्वास्थ्य विभाग कोंडागांव सरकार की फाइलें सरपट दौड़ रही हैं, लेकिन मरीजों की जान बचाने वाली करोड़ों की गाड़ियां पिछले 8 वर्षों से विभाग के आंगन में ‘दम’ तोड़ रही हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अपराध है। जहां एक ओर ग्रामीण आज भी मरीजों को खाट पर लादकर मीलों पैदल चलने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की सुस्ती ने करोड़ों के निवेश को कबाड़ में तब्दील कर दिया है।
लापरवाही की ‘क्रोनोलॉजी’: कहाँ फंसा पेंच?
इन गाड़ियों की हालत देखकर साफ है कि विभाग ने इन्हें चलाने की नीयत ही नहीं रखी थी:
- रजिस्ट्रेशन का ‘खेल’: सूत्रों के अनुसार, इन गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया गया। सवाल यह है कि क्या 8 साल में फाइलें मेज से आरटीओ दफ्तर तक नहीं पहुँच पाईं?

- फंड का ‘फालूदा’: सांसद निधि, विधायक निधि, DMF और LWE जैसी योजनाओं का पैसा इन गाड़ियों में लगा था। जनता पूछ रही है कि इन 8 सालों में इनके रखरखाव (Maintenance) के नाम पर जो बजट आया, वह किस ‘साहब’ या ‘बाबू’ की जेब में गया?
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‘उजाला टुडे’ की मांग: अब नपेंगे ‘साहब’ और ‘लेखापाल’
इस महा-लापरवाही के लिए केवल नेतृत्व ही नहीं, बल्कि वित्तीय प्रबंधन देखने वाले कर्मचारी भी बराबर के दोषी हैं। ‘उजाला टुडे’ प्रशासन से इन ठोस कार्यवाहियों की मांग करता है:
- CMHO की जवाबदेही: 2017 से अब तक पदस्थ रहे सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका की जांच हो। क्या उन्हें अपने ही दफ्तर के बाहर सड़ता सरकारी पैसा नजर नहीं आया?
- लेखापालों पर गिरे गाज: विभाग के लेखापालों की भूमिका सबसे संदिग्ध है। गाड़ियों के बीमा, टैक्स और रजिस्ट्रेशन के लिए आवंटित राशि का क्या हुआ? क्या कागजों में मेंटेनेंस का खेल खेला गया? संबंधित लेखापालों के विरुद्ध विभागीय जांच कर उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए।
- वेतन से हो वसूली: सरकारी संपत्ति को बर्बाद करने के जुर्म में दोषी अधिकारियों और क्लर्कों के वेतन से इस आर्थिक क्षति की भरपाई की जाए।
‘उजाला टुडे’ का संकल्प: जब तक न्याय नहीं, तब तक चैन नहीं!
कोंडागांव की गरीब जनता के हक पर डकैती डालने वाले इन सफेदपोशों का चेहरा हम बेनकाब करते रहेंगे। ‘उजाला टुडे’ यह स्पष्ट करता है कि यह केवल एक खबर नहीं है, बल्कि एक मुहिम है।
“जब तक इस मामले में दोषी अधिकारियों और भ्रष्ट लेखापालों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक ‘उजाला टुडे’ इस आवाज को उठाता रहेगा। हम फाइलों को दबने नहीं देंगे और न ही दोषियों को भागने देंगे।”
कलेक्टर महोदया , अब आपकी बारी है!
जिले के मुखिया से उम्मीद है कि वे इस भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को तोड़ेंगे। उजाला टुडे इस मामले की पल-पल की अपडेट जनता तक पहुँचाता रहेगा जब तक कि जिम्मेदार सलाखों के पीछे या निलंबन की सूची में न हों।


