संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
रात के अंधेरे में ‘अंधेरगर्दी’: अंबुजा फाउंडेशन ने NOC को समझा ‘वर्क ऑर्डर’, मजदूरों के हक पर चलाई JCB!
कोंडागांव के सोनाबाल में नियमों को ताक पर रखकर आधी रात को जल संरक्षण कार्यों में खपाई जा रही थीं मशीनें
अधिकारियों और पंचायत को नहीं कोई जानकारी, जनपद सदस्य प्रतिनिधि रघुराम सेठिया ने कहा— “बिना वर्क ऑर्डर और बिना सूचना के हो रहा था अवैध निर्माण”
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर रुकवाया काम; बिहान समूह और ग्राम पटेल की भूमिका पर भी उठे सवाल
उजाला टुडे कोंडागांव 21 मई 2026-कोंडागांव। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम पंचायत सोनाबाल खुटपारा में विकास कार्यों के नाम पर एक बड़ा प्रशासनिक घालमेल और नियमों के खुले उल्लंघन का मामला सामने आया है। कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत ‘परिवर्तन परियोजना’ चला रहे अंबुजा फाउंडेशन और एचडीएफसी बैंक ने सरकारी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर बिना किसी वैध ‘कार्य आदेश’ के सीधे जमीनी निर्माण शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब दिन के उजाले को छोड़कर, रात के सन्नाटे में भारी मशीनों (JCB) से डबरी और तालाब की खुदाई शुरू कर दी गई। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सजगता से रात में चल रहे इस ‘खेल’ का भंडाफोड़ हुआ है।
NOC का खेल: अनापत्ति प्रमाण पत्र को ही मान लिया ‘माई-बाप’
अंबुजा फाउंडेशन ने ग्राम पंचायत सोनाबाल से प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) के तहत चेक डैम जीर्णोद्धार, तालाब गहरीकरण और सिंचाई कार्यों के लिए एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करवाया था। लेकिन संस्था के नुमाइंदे शायद यह भूल गए कि पंचायती राज अधिनियम के तहत NOC केवल एक सहमति है, कार्य आदेश या प्रशासनिक स्वीकृति नहीं। बिना जनपद या जिला पंचायत की तकनीकी स्वीकृति (TS) और प्रशासनिक मंजूरी (AS) के किसी भी सार्वजनिक भूमि पर मशीनों का उतरना सीधे तौर पर अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है।
अधिकारियों को नहीं कोई भनक, सुबह जानकारी देने की बात कहकर झाड़ा पल्ला
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा झोल तब सामने आया जब मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क साधा। जनपद सदस्य प्रतिनिधि रघुराम सेठिया ने बताया कि उन्होंने खुद मौके से जनपद सीईओ, तुषार नाग (जनपद पीओ) सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को फोन लगाया। लेकिन अधिकारियों ने साफ पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में किसी प्रकार की जानकारी नहीं है और वे सुबह जानकारी प्राप्त कर कुछ बता पाएंगे।

गुपचुप भूमि पूजन और ग्राम पटेल द्वारा उद्घाटन का दावा!
मामले में एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब पूछताछ में पता चला कि इस कार्य का गुपचुप तरीके से भूमि पूजन या उद्घाटन भी करा दिया गया था। रघुराम सेठिया ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि ‘बिहान समूह’ (यशौदा समूह) के कुछ सदस्यों की मौजूदगी में ग्राम पटेल के द्वारा इस कार्य का उद्घाटन करा दिया गया था। सवाल यह उठता है कि जनता द्वारा चुने गए सरपंच, पंच और जनपद सदस्यों को बिना विश्वास में लिए और बिना किसी शासकीय आदेश के, इस तरह से किसी भी संस्था को काम शुरू करने की छूट किसने दी?
मजदूरों के पेट पर JCB का वार, मौके से गायब थे श्रमिक
इस जल संरक्षण और डबरी निर्माण परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों और मनरेगा कार्डधारियों को रोजगार मुहैया कराना होना चाहिए था। लेकिन अंबुजा फाउंडेशन ने स्थानीय ग्रामीणों के पेट पर लात मारते हुए रात के अंधेरे में जेसीबी (JCB) से काम निपटाना शुरू कर दिया।
जनपद सदस्य प्रतिनिधि रघुराम सेठिया ने ऑन-कैमरा पुष्टि की कि:
“मौके पर गांव का एक भी मजदूर मौजूद नहीं था। केवल जेसीबी मशीन से रात के समय काम कराया जा रहा था। सरपंच साहब को भी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को बिना बताए यह निर्माण कार्य कैसे शुरू हुआ, इस पर हमें घोर आपत्ति है। इसलिए हमने सरपंच और ग्रामीणों के साथ मिलकर काम को रुकवा दिया है। जब तक संबंधित विभाग या एजेंसी पूरे दस्तावेज और जानकारी नहीं देती, काम शुरू नहीं होगा।”
जांच के घेरे में ‘परिवर्तन’ परियोजना
बिना प्रशासनिक अनुमति, बिना किसी सरकारी निगरानी और बिना वर्क ऑर्डर दिखाए किए जा रहे इस निर्माण कार्य ने अंबुजा फाउंडेशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं होती और स्थानीय मजदूरों को रोजगार की गारंटी नहीं मिलती, तब तक गांव में किसी भी प्रकार की मनमानी मशीनरी को घुसने नहीं दिया जाएगा। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस ‘रात के खेल’ पर क्या कड़ा एक्शन लेता है।

