संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
महिला आरक्षण: “चुनावी ढोंग” या “हक की लड़ाई”? CPI ने खोली BJP-कांग्रेस की पोल!
उजाला टुडे कोंडागांव 02 मई 2026-कोण्डागांव: महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की दो सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों के बीच चल रही ‘क्रेडिट वार’ के बीच अब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने मोर्चा खोल दिया है। CPI के छत्तीसगढ़ राज्य परिषद सचिव मंडल सदस्य, कामरेड तिलक पाण्डे ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भाजपा और कांग्रेस दोनों पर “अवसरवादी राजनीति” का तीखा हमला बोला है।
असली नायक को भूल गए ‘क्रेडिट’ लेने वाले दल
तिलक पाण्डे ने याद दिलाया कि महिला आरक्षण की असली सूत्रधार कामरेड गीता मुखर्जी थीं।
- ऐतिहासिक संदर्भ: 1996 में गीता मुखर्जी ने ही संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्ष के रूप में 33% आरक्षण का खाका तैयार किया था।
- आरोप: आज के तथाकथित विकासवादी दल गीता मुखर्जी के संघर्ष को दरकिनार कर अपनी “राजनीतिक रोटियां” सेंकने में जुटे हैं।
कांग्रेस और भाजपा: एक ही सिक्के के दो पहलू?
CPI ने दोनों प्रमुख दलों की “दोहरी मानसिकता” पर प्रहार करते हुए कहा:
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- कांग्रेस: दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद इस विधेयक को कभी निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंचाया।
- भाजपा: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम पर चुनावी ढोंग रचा। परिसीमन (Delimitation) की शर्त रखकर इसे भविष्य के भरोसे छोड़ दिया, जो महिलाओं के साथ छलावा है।
“पूंजीवादी दलों के लिए महिला सशक्तिकरण केवल एक चुनावी नारा है। असल में ये दल महिलाओं को सत्ता में समान भागीदारी देने से डरते हैं।”
— कामरेड तिलक पाण्डे
CPI की 3 बड़ी मांगें: आर-पार की जंग
CPI छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार वाकई गंभीर है, तो उसे ये कदम उठाने चाहिए:
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- तत्काल लागू हो आरक्षण: बिना परिसीमन (Limitation) के इंतजार के 33% आरक्षण को तुरंत प्रभावी बनाया जाए।
- कोटा के भीतर कोटा: विधेयक में OBC और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए उप-आरक्षण का प्रावधान हो, ताकि यह सही मायने में समावेशी बने।
- क्रेडिट पॉलिटिक्स का अंत: इसे किसी दल की ‘बपौती’ बनाने के बजाय गीता मुखर्जी जैसे संघर्षशील नेताओं के योगदान को सम्मान दिया जाए।
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“मशाल बुझने नहीं देंगे”
तिलक पाण्डे ने चेतावनी दी है कि कम्युनिस्ट पार्टी इस संघर्ष को तब तक जारी रखेगी जब तक संसद और विधानसभाओं में 33% भागीदारी एक कानूनी हकीकत नहीं बन जाती। उन्होंने देश की महिलाओं से आह्वान किया कि वे भाजपा और कांग्रेस के इस “पाखंड” को पहचानें और अपने संवैधानिक हक के लिए एकजुट हों।

