संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव महा-विस्फोट: लकड़ी तस्करी सिंडिकेट के भंडाफोड़ से हड़कंप, निष्पक्ष पत्रकारों के खिलाफ साजिश रचने वाली भाजपा नेत्री ज्योति ऊर्फ जूही तिवारी और प्रवीण पुजारी घिरे , PMO और वन मंत्री तक पहुंचा मामला!
कड़े डिजिटल व शासकीय साक्ष्यों के साथ पत्रकारों ने खोला मोर्चा, दलाल चेहरों के भी मुखौटे उतरना तय!
उजाला टुडे कोंडागांव 26 मई 2026-कोंडागांव जिले में सत्ता और पद के रसूख की आड़ में वन संपदा की खुलेआम लूट करने और इसे उजागर करने वाले लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को झूठे मुकदमों में फंसाकर दबाने के एक बहुत बड़े आपराधिक षड्यंत्र का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। बीती 18 मई की रात को मसोरा अग्रवाल पेट्रोल पंप के पास अवैध लकड़ी से लदी संदिग्ध गाड़ी को रंगे हाथों पकड़वाने वाले पत्रकारों के खिलाफ जब भाजपा कन्या शक्ति की जिला संयोजिका ज्योति उर्फ जूही तिवारी ने मनगढ़ंत शिकायत दर्ज कराई, तो जिले के चौथे स्तंभ ने एकजुट होकर ऐसा चौतरफा कानूनी मोर्चा खोला है कि पूरे प्रशासनिक व राजनैतिक गलियारे में हड़कंप मच गया है।
पीड़ित पत्रकारों ने साक्ष्यों की पूरी ‘क्राइम फाइल’ के साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के माध्यम से), सूबे के वन मंत्री केदार कश्यप, प्रभारी मंत्री लखन लाल देवांगन, भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लता उसेंडी, भाजपा जिलाध्यक्ष सेवक राम नेताम, जिला पुलिस अधीक्षक कोंडागांव, स्थानीय थाना और अजाक (SC/ST) थाने में नामजद व व्यक्तिगत कड़क शिकायतें दर्ज करा दी हैं।
पहला बड़ा सबूत: वन विभाग का आधिकारिक कागज़ और अपराधी का बयान
खोजी पत्रकारों के हाथ वन विभाग (सहायक परिक्षेत्राधिकारी फरसगांव) के समक्ष दर्ज अपराधी ईश्वर पाण्डेय का आधिकारिक और प्रमाणित शासकीय बयान लगा है। इस आधिकारिक शासकीय कागज़ में अपराधी ने लिखित रूप में स्वीकार किया है कि उसने जूही तिवारी कोंडागांव के कहने पर ही जामुन के हरे-भरे वृक्षों की अवैध कटाई की थी और उसे वाहन क्रमांक CG-04-JD-1668 में लोड करवाया था। इस सरकारी दस्तावेज ने ऑन-रिकॉर्ड साबित कर दिया है कि नेत्री ही इस पूरे तस्करी सिंडिकेट की मुख्य सूत्रधार है।
दूसरा बड़ा सबूत: कैमरे के सामने रो पड़ा वाहन मालिक उत्तम, प्रवीण पुजारी भी बेनकाब
इस आग में घी डालने का काम तब हुआ जब खुद पीड़ित वाहन मालिक उत्तम कुमार नेवरा (निवासी- बड़ेराजपुर) ने मिडिया के सामने कैमरे पर रोते हुए जूही तिवारी के साथ उनकी सहयोगी प्रवीण पुजारी के काले कारनामों की पोल खोल दी। उत्तम ने बताया कि जूही तिवारी ने “कागज पूरा ओके है” बोलकर उसे धोखे में रखा और गाड़ी को लकड़ी लोड करने सिंगापुरी भेजा। जब वन विभाग ने घेराबंदी की, तो जूही तिवारी ने ड्राइवर को गाड़ी भगाने का निर्देश दिया। उत्तम ने रोते हुए कहा कि “जूही तिवारी और प्रवीण पुजारी ने मुझे चूतिया बनाकर गुमराह करके रख दिया, प्रवीण ने पैसा डलवाने का झूठा झांसा दिया और अब दोनों मेरा फोन नहीं उठा रही हैं।”
तीसरा बड़ा सबूत: फंसाने के लिए फोन-पे (PhonePe) पर एकतरफा पैसे भेजने का डिजिटल ट्रैप
सिंडिकेट का घिनौना चेहरा तब उजागर हुआ जब 18 तारीख को रंगे हाथों गाड़ी पकड़े जाने के बाद, 19 मई की रात ठीक 08:46 बजे जूही तिवारी ने प्रार्थी पत्रकार दुर्गानाथ देवांगन को उगाही या लेन-देन के झूठे केस में फंसाने की नीयत से उनके फोन-पे अकाउंट पर बिना किसी बातचीत के एकतरफा ₹2500 ट्रांसफर कर दिए। नोटिफिकेशन न आने के कारण पत्रकार को इसका पता 21 मई को चला, जिसे तुरंत पुलिस रिकॉर्ड पर लाकर पत्रकारों ने नेत्री के ‘वित्तीय ट्रैप’ वाले षड्यंत्र को पूरी तरह फेल कर दिया है।
चौथा बड़ा सबूत: वरिष्ठ पत्रकारों का अकाट्य तकनीकी साक्ष्य
नेत्री द्वारा पत्रकारों पर लगाए गए झूठे आरोपों को पूरी तरह ध्वस्त करते हुए तकनीकी साक्ष्य सामने आए हैं। वरिष्ठ पत्रकार सुनील यादव 18 तारीख की रात 08:30 से 10:40 बजे तक निरंतर अपनी मेडिकल दुकान पर थे, जिसका पुख्ता सीसीटीवी फुटेज और व्हाट्सएप कॉल लॉग ऑन-रिकॉर्ड है। वहीं, पत्रकार ज्योति कुमार कमलासन घटना के दिन कोंडागांव में थे ही नहीं, वे अपने पिताजी की सर्जरी करवाकर केरल से तिरुनेलवेली-बिलासपुर एक्सप्रेस (ट्रेन क्रमांक- 22620) से 18 तारीख की रात 09:30 बजे रायपुर स्टेशन पहुंचे थे, जिसकी रेलवे टिकट और गूगल टाइमलाइन पुलिस को सौंप दी गई है।
भविष्य में ‘महिला कार्ड’ के दुरुपयोग की आशंका: पुलिस में ‘अग्रिम प्रतिरक्षण’ दर्ज
चूंकि मुख्य आरोपी एक महिला हैं और राजनीतिक पद पर हैं, इसलिए प्रार्थी पत्रकारों (जिनमें अनुसूचित जाति वर्ग के संपादक भी शामिल हैं) ने अजाक थाने और स्थानीय थाने में एक बेहद रणनीतिक और अति-महत्वपूर्ण बिंदु ‘अग्रिम प्रतिरक्षण’ दर्ज कराया है। पत्रकारों ने लिखित रूप में दर्ज कराया है कि रंगे हाथों पकड़े जाने की बौखलाहट में यह नेत्री भविष्य में अपनी चमड़ी बचाने के लिए पत्रकारों पर छेड़छाड़, लज्जाभंग या किसी अन्य गंभीर स्त्री-संबंधी झूठे आपराधिक मामले का सहारा ले सकती है। अतः ऐसी किसी भी प्रतिशोधपूर्ण शिकायत पर बिना किसी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच के कोई एकतरफा पुलिसिया कार्रवाई न की जाए।
पर्दे के पीछे छिपे संदिग्धों को मूक संरक्षण देने वालों की भी जांच शुरू
पत्रकारों ने इस बात पर भी गहरा रोष जताया है कि क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस अवैध लकड़ी परिवहन सिंडिकेट को पर्दे के पीछे से कुछ अन्य तत्वों और रसूखदारों का भी मूक संरक्षण प्राप्त था, जो सच लिखने वाले ईमानदार पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए तस्करों की दलाली कर रहे हैं। पत्रकारों ने साफ किया है कि इस सिंडिकेट को हवा देने वाले उन सभी संदिग्ध चेहरों को बेनकाब करने के लिए भी कानूनी स्तर पर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, जिन्हें बहुत जल्द प्रशासनिक व पुलिस जांच के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
पत्रकार ने भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लता उसेंडी और जिलाध्यक्ष सेवक राम नेताम से मांग की है कि संगठन की साख को बट्टा लगाने वाली ज्योति ऊर्फ जूही तिवारी को तत्काल पदमुक्त कर पार्टी से निष्कासित किया जाए, साथ ही पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इस महा-सिंडिकेट की मुख्य सरगना जूही तिवारी और प्रवीण पुजारी के खिलाफ तत्काल वन संपदा की चोरी, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने और आपराधिक षड्यंत्र के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाए।



