संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
विशेष रिपोर्ट: अबूझमाड़ के भविष्य पर भ्रष्टाचार का साया, 1947 के बाद पहली बार बन रहे स्कूल में ‘घटिया’ निर्माण
उजाला टुडे कोंडागांव 19 अप्रैल 2026-बीजापुर/भैरमगढ़: नक्सलवाद के साये से बाहर निकल रहे बीजापुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में विकास की गति को लेकर जहाँ एक ओर सरकार पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के पुराने खेल ने शासन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भैरमगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत चिंगेर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है।
77 साल का इंतजार और ‘रेत’ की बुनियाद
चिंगेर पंचायत के ग्रामीणों के लिए यह ऐतिहासिक पल था कि 1947 (आजादी) के बाद पहली बार उनके गाँव में स्कूल भवन का निर्माण हो रहा है। लेकिन, ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार इस ऐतिहासिक कार्य को ‘कमीशनखोरी’ की भेंट चढ़ा रहा है।
- घटिया सामग्री का उपयोग: निर्माण कार्य में मानक स्तर की ईंटों और सीमेंट के बजाय गुणवत्ताहीन सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है।
- नियमों की अनदेखी: तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखकर ढांचा खड़ा किया जा रहा है, जिससे भविष्य में मासूम बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।
मंत्री के दौरे के बाद भी बेखौफ ठेकेदार
हैरानी की बात यह है कि अभी महज 10 दिन पहले ही पूर्व वन मंत्री केदार कश्यप ने इन क्षेत्रों का दौरा कर विकास कार्यों की समीक्षा की थी। मंत्री के दौरे के तत्काल बाद इस तरह का गुणवत्ताहीन कार्य यह दर्शाता है कि ठेकेदार को न तो शासन का डर है और न ही प्रशासन का खौफ।
ग्रामीणों की मांग: “हमें भवन नहीं, हमारे बच्चों का सुरक्षित भविष्य चाहिए। इस भ्रष्ट ठेकेदार का लाइसेंस तत्काल रद्द कर उस पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए।”
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
इस भ्रष्टाचार के लिए आखिर किसे कटघरे में खड़ा किया जाए?
- अधिकारी-कर्मचारी: क्या मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार इंजीनियरों ने अपनी आँखें मूंद ली हैं? क्या ‘प्रतिशत’ के चक्कर में गुणवत्ता से समझौता किया गया?
- जनप्रतिनिधि: क्या स्थानीय नेताओं का ठेकेदार पर वरदहस्त है, जिसके कारण वह मनमानी कर रहा है?
- सिस्टम: क्या यह पूरा सिस्टम ही इस कदर जकड़ा हुआ है कि अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी विकास के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है?
अबूझमाड़ में बंदूकों की गूंज शांत होने के बाद अब यदि भ्रष्टाचार का शोर सुनाई देगा, तो ग्रामीणों का विश्वास लोकतंत्र से उठ जाएगा। जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को चाहिए कि वे तुरंत चिंगेर पंचायत के स्कूल निर्माण की तकनीकी जांच कराएं और दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर कड़ी मिसाल पेश करें।
नोट: यह समाचार जनता की आवाज है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी, बल्कि उन आदिवासियों के साथ भी धोखा होगा जो दशकों बाद शिक्षा की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
