
महाभ्रष्टाचार: करोड़ों की PHC बिल्डिंग साल भर में हुई ‘जर्जर’, जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर कब गिरेगी गाज?
मई की पहली फुहार में ही टपकने लगी छत; क्या कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गई अस्पताल की मजबूती? जांच और रिकवरी की उठ रही मांग
उजाला टुडे कोंडागांव 07 मई 2026-कोंडागांव जिले में सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी और भ्रष्टाचार का एक और नमूना सामने आया है। स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की नई इमारत, जिसे बने अभी एक साल भी नहीं बीता, मई की मामूली बारिश की मार भी नहीं झेल पाई। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह भवन अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। अस्पताल के भीतर टपकते पानी ने न केवल प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है, बल्कि मरीजों की जान को भी जोखिम में डाल दिया है।
जिम्मेदार मौन: इंजीनियर और SDO के बीच ‘पास-पास’ का खेल
निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों का जवाब देने के बजाय विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से भागते नजर आ रहे हैं।
- पल्ला झाड़ते इंजीनियर: जब ‘उजाला टुडे’ ने इंजीनियर कमलेश साहू से इस बदहाली पर दोबारा सवाल किया, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय गेंद वरिष्ठों के पाले में डालते हुए कहा— “SDO साहब से बात कर लीजिए।”
- SDO का ‘मैसेज’ तंत्र: SDO रविकांत भोसले की कार्यप्रणाली और भी संदिग्ध है। फोन न उठाना और व्हाट्सएप पर “बैठक में हूँ” का हवाला देकर बात टालना अब उनकी पहचान बन चुका है। अधिकारी ने मैसेज कर पत्रकार को दोबारा फोन करने को तो कहा, लेकिन जब संपर्क किया गया तो उन्होंने न कॉल रिसीव की और न ही दोबारा पलटकर जवाब दिया।
अधिकारियों का यह ‘छुपम-छुपाई’ वाला रवैया स्पष्ट करता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
जांच, रिकवरी और ब्लैकलिस्टिंग की उठ रही मांग
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार है। स्लैब ढलाई में घटिया सामग्री का उपयोग और क्यूरिंग (तरावट) में कोताही इसके मुख्य कारण हैं। अब जनता और जागरूक नागरिक प्रशासन से सीधे सवाल कर रहे हैं:
- कठोर जांच: क्या शासन इस निर्माण कार्य की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराएगा?
- ठेकेदार से रिकवरी: जिस ठेकेदार ने यह ‘घटिया’ निर्माण किया है, उससे सार्वजनिक धन की वसूली की जानी चाहिए और उसे ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए।
- अधिकारियों पर कार्रवाई: क्या ‘ओके रिपोर्ट’ पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई होगी?
महज वॉटरप्रूफिंग नहीं, ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की जरूरत
वर्तमान में विभाग छत पर वॉटरप्रूफिंग कराकर मामले को दबाने (लीपापोती) की कोशिश कर रहा है। लेकिन उजाला टुडे यह मांग करता है कि केवल मरम्मत से काम नहीं चलेगा। जब तक दोषी इंजीनियर, SDO और ठेकेदार के विरुद्ध जांच के बाद वसूली की कार्रवाई नहीं होती, तब तक जनता के टैक्स के पैसे का इसी तरह दुरुपयोग होता रहेगा।
क्या जिला प्रशासन इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगा, या फिर ‘साहबों’ और ‘ठेकेदारों’ का यह गठबंधन इसी तरह फलता-फूलता रहेगा?
उजाला टुडे का संकल्प: “जब तक न्याय नहीं, तब तक विश्राम नहीं”
इस भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘उजाला टुडे’ ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि प्रशासन की ‘वॉटरप्रूफिंग’ वाली लीपापोती से यह मामला दबने वाला नहीं है।
जब तक इस घटिया निर्माण की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं होती, दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं होती और सरकारी धन की वसूली की प्रक्रिया शुरू नहीं की जाती, तब तक ‘उजाला टुडे’ इस खबर को प्रमुखता से चलाता रहेगा। जनता के हक और गाढ़े पसीने की कमाई की लूट के खिलाफ हमारी यह मुहिम कार्रवाई होने तक निरंतर जारी रहेगी। शासन-प्रशासन की हर हरकत और इस मामले की हर फाइल पर हमारी पैनी नजर है।
