संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
बीमा लोकपाल के फर्जी एजेंट बनकर ₹29 लाख से अधिक की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश, दिल्ली-यूपी से 7 आरोपी गिरफ्तार
उजाला टुडे कोंडागांव 19 मई 2026- कोंडागांव:(फरसगांव ) छत्तीसगढ़ की कोंडागांव पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश करने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। यह गिरोह देशव्यापी स्तर पर लोगों को अपना शिकार बना रहा था। फरसगांव पुलिस की एक विशेष टीम ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद व बरेली में लगातार 10 दिनों तक डेरा डालकर इस संगठित गिरोह के 07 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस पिछले 3 महीनों से इन आरोपियों की सुरागकशी में जुटी हुई थी।
शिकायत से खुला ठगी का खेल
मामले का खुलासा तब हुआ जब फरसगांव थाना क्षेत्र के कोपरा बाजारपारा निवासी प्रार्थी शंकरलाल राणा (उम्र 57 वर्ष) ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। प्रार्थी के अनुसार, 27 नवंबर 2025 को उनके पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बीमा लोकपाल परिषद (सी.आई.ओ.) का एजेंट बताया और झांसा दिया कि प्रार्थी का बीएसई स्टॉक एक्सचेंज में ₹71,72,499 का फंड बकाया है, जिसे उन्होंने अभी तक क्लेम नहीं किया है।
इसके बाद ठगों ने पेमेंट रिफंड कराने की प्रक्रिया के नाम पर प्रार्थी का विश्वास जीता। आरोपियों ने अलग-अलग 5 मोबाइल नंबरों से फर्जी नाम (शिव शंकर पाण्डे, एम. के. बजाज, साक्षी शर्मा, बृज मोहन पाण्डे, दीपक सिंह) बताकर फर्जी दस्तावेज भेजे। ढाई महीने के भीतर प्रार्थी की मासूमियत का फायदा उठाकर अलग-अलग किश्तों में कुल ₹29,69,673 (उनतीस लाख उनहत्तर हजार छह सौ रुपये) विभिन्न ‘म्यूल (फर्जी/किराए के) बैंक खातों’ में डलवाकर ठग लिए। प्रार्थी की रिपोर्ट पर फरसगांव पुलिस ने अपराध क्रमांक 29/2026, धारा 318(2), 319, 336(3), 338, 340(2), 61(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
तरीका-ए-वारदात: अंगूठा छाप से लेकर MSc IT पास तक शामिल
यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से कई वर्षों से साइबर अपराध कर रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि चौंकाने वाली है, जिसमें अंगूठा छाप से लेकर एमएससी (IT) किए हुए प्रोफेशनल तक शामिल हैं।
- ऐसे तैयार होते थे फर्जी खाते: गिरोह के सदस्य सबसे पहले दिल्ली के स्लम इलाकों (जैसे संगम विहार) के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसों का लालच देकर ढूंढते थे। उनके एजेंटों के माध्यम से विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। बड़ी चालाकी से खाताधारकों के आधार कार्ड में अपना मोबाइल नंबर लिंक करवा दिया जाता था, ताकि बैंक के सभी अलर्ट्स और ओटीपी सीधे ठगों के पास आएं। इसके बाद एजेंट पासबुक, एटीएम कार्ड, चेक बुक और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपने पास रख लेते थे ताकि पीड़ित द्वारा पैसे डालते ही तुरंत एटीएम से नकद आहरण (Withdrawal) किया जा सके।
- अवैध डेटा और छलावा: गिरोह के मुख्य कॉलर ब्रोकर कंपनियों से अवैध रूप से लोगों का डेटा खरीदते थे। इसके बाद पीड़ितों को कॉल कर बीमा राशि मैच्योर होने का झांसा देते और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे ऐंठते थे। आरोपी प्रार्थी को ठगने के लिए अलग-अलग आवाजें भी निकालते थे।
- पुलिस से बचने के पैंतरे: मुख्य आरोपी ‘रजा हुसैन’ पहले भी दो बार साइबर अपराध के मामले में जेल जा चुका है। वह गिरोह को पुलिस से बचने के पैंतरे सिखाता था। बातचीत के लिए छोटे कीपैड फोन और म्यूल सिम का उपयोग किया जाता था, जबकि अपने परिवार और दोस्तों से बात करने के लिए नॉर्मल फोन का इस्तेमाल होता था। पुलिस को चकमा देने के लिए वे बार-बार कॉलिंग की जगह बदलते रहते थे।
तकनीकी विश्लेषण और पुलिस की सफलता
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक कोंडागांव पंकज चन्द्रा (IPS) एवं प्रभारी पुलिस अधीक्षक आकाश श्रीश्रीमाल (IPS) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चन्द्रा के मार्गदर्शन में एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने लगभग दो महीनों तक लगातार सभी म्यूल सिम और बैंक खातों का तकनीकी व सीडीआर विश्लेषण किया।
जब छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची, तो भनक लगते ही सभी आरोपी अंडरग्राउंड हो गए थे। लेकिन एसडीओपी अभिनव उपाध्याय की सूझबूझ और टीम की मुस्तैदी से आरोपियों के मोबाइल नंबरों के सीडीआर, लोकेशन और बैंक डिटेल खंगालकर दिल्ली व उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से घेराबंदी कर सभी 7 आरोपियों को धर दबोचा गया। पुलिस ने पहली बार किसी केस में मुख्य साजिशकर्ता और मुख्य कॉलर को चिन्हित कर गिरफ्तार किया है। आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ लाया जा रहा है।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम:
- इसरार अहमद (पिता इकरार अहमद, उम्र 52 वर्ष) – निवासी: संगम विहार, दिल्ली।
- आकिल (पिता इसरार अहमद, उम्र 21 वर्ष) – निवासी: खाईखेड़ा, जिला बरेली (उ.प्र.), हाल मुकाम: संगम विहार, दिल्ली।
- शिवम गुप्ता (पिता रामेशचन्द्र गुप्ता, उम्र 29 वर्ष) – निवासी: संगम विहार, दिल्ली।
- नितिन कुमार त्यागी (पिता स्व. श्री जय कुमार त्यागी, उम्र 36 वर्ष) – निवासी: ग्राम सरना, गाजियाबाद (उ.प्र.)।
- रजा हुसैन (पिता फेराई, उम्र 39 वर्ष) – निवासी: नई दिल्ली (मुख्य आरोपी व मास्टरमाइंड)।
- तरूण कौशिक (पिता श्री नरेन्द्र कुमार शर्मा, उम्र 46 वर्ष) – निवासी: रोहतास नगर, दिल्ली।
- प्रदीप बघेल (पिता लालता प्रसाद बघेल, उम्र 32 वर्ष) – निवासी: हर्ष विहार, थाना टोलामोड, जिला गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)।
इस बड़ी कामयाबी में एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय के साथ निरीक्षक राजकुमार सोरी, उप निरीक्षक शशिभूषण पटेल, प्रधान आरक्षक शैलेन्द्र ठाकुर, आरक्षक अजरंग बघेल, रामकुमार ठाकुर, लक्ष्मीनारायण शोरी, महिला आरक्षक सरस्वती यादव एवं साइबर टीम से प्रधान आरक्षक अजय बघेल व बीजू यादव की विशेष भूमिका रही। इसके अलावा हेड क्वार्टर कोंडागांव से डीएसपी नरेन्द्र पुजारी, निरीक्षक सौरभ उपाध्याय, थाना प्रभारी फरसगांव चन्द्रशेखर श्रीवास, प्रधान लूमन भंडारी, आरक्षक मनोज पोयाम और जीतू मरकाम का भी सराहनीय योगदान रहा।

