संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव महा-विस्फोट: पत्रकारों को फंसाने वाली भाजपा नेत्री जूही तिवारी के साथ ‘प्रवीण पुजारी’ भी बेनकाब, पीड़ित वाहन मालिक ने रोते हुए खोला लकड़ी तस्करी का पूरा राज!
उजाला टुडे कोंडागांव 27 मई 2026-कोंडागांव। सत्ता और पद के रसूख की आड़ में कोंडागांव के निष्पक्ष पत्रकारों को झूठे मामले में फंसाने का षड्यंत्र रचने वाली भाजपा कन्या शक्ति की जिला संयोजिका ज्योति उर्फ जूही तिवारी और उनकी सहयोगी प्रवीण पुजारी के पूरे सिंडिकेट का अब पूरी तरह भंडाफोड़ हो चुका है। वन विभाग के सरकारी दस्तावेजों के बाद अब पीड़ित वाहन मालिक उत्तम कुमार नेवरा ने कैमरे के सामने आकर रोते हुए जूही तिवारी और प्रवीण पुजारी के काले कारनामों और धोखेबाजी का पूरा कच्चा चिट्ठा खोल दिया है।
“कागज ओके है बोलकर नेत्री ने जाल में फंसाया”
मिडिया के सामने हाथ जोड़कर न्याय की भीख मांगते हुए वाहन मालिक उत्तम कुमार नेवरा (निवासी- बड़े राजपुर) ने बताया कि उसकी टाटा 1109 (गाड़ी नंबर CG-04-JD-1668) का उपयोग माल सप्लाई के लिए होता है। विगत 12 अप्रैल को जूही तिवारी ने उसे फोन किया और कहा कि सिंगापुर में उसकी कटी हुई लकड़ी रखी है, उसे ले जाना है और “कागज पूरा ओके है।” नेत्री के इस झांसे में आकर उत्तम ने अपने ड्राइवर को गाड़ी लोड करने भेज दिया। जब आधी गाड़ी लकड़ी लोड होने के समय वन विभाग की टीम ने घेराबंदी की, तो जूही तिवारी ने ड्राइवर को सीधे निर्देश दिया कि “गाड़ी वहां से तुरंत भगाओ!” लेकिन बिना वैध कागजात के हो रहे इस अवैध परिवहन के कारण वन विभाग की टीम ने गाड़ी को मौके पर ही धर दबोचा।
जूही तिवारी और प्रवीण पुजारी का ‘गुमराह’ करने वाला खेल
पीड़ित उत्तम कुमार नेउरा ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि गाड़ी पकड़े जाने के बाद जब वह परेशान हुआ, तो जूही तिवारी के साथ उनकी सहयोगी प्रवीण पुजारी भी इस खेल में शामिल हो गया। प्रवीण पुजारी के द्वारा भी पीड़ित के पास कॉल किया गया और बाद में पीड़ित को केसकाल फॉरेस्ट ऑफिस भी भेजा गया।
उत्तम ने बताया कि वह लगातार अपनी गाड़ी छुड़ाने के लिए जूही तिवारी और प्रवीण पुजारी दोनों से गुहार लगाता रहा, लेकिन इन दोनों ने उसे लगातार झूठा आश्वासन देकर सिर्फ गुमराह करके रख दिया। बाद में जब पीड़ित ने पैसे और गाड़ी की बात की, तो प्रवीण पुजारी ने कहा कि “मैं पैसा डलवा देता हूँ”— लेकिन न तो आज तक कोई पैसा डलवाया गया और न ही पीड़ित की गाड़ी बाहर निकलवाई गई, बल्कि दोनों ने अब फोन उठाना भी बंद कर दिया है। उत्तम ने रोते हुए कहा कि “इन्होंने मुझे बेवकूफ बनाकर रख दिया, गाड़ी ही मेरी आजीविका का एकमात्र साधन है और मैं बर्बाद हो रहा हूँ।”
सिंडिकेट को मूक सहमति देने वाले संदिग्ध चेहरों की भी जांच की मांग
इस पूरे मामले में पत्रकारों और सजग नागरिकों द्वारा प्रशासन से यह भी मांग की जा रही है कि क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे इस अवैध लकड़ी परिवहन सिंडिकेट की गहराई से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आशंका जताई जा रही है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध कारोबार को पर्दे के पीछे से कुछ अन्य तत्वों और कथित रसूखदारों का भी मूक संरक्षण प्राप्त था, जो सच लिखने वाले ईमानदार पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए तस्करों का साथ दे रहे हैं। पीड़ित पत्रकारों ने साफ किया है कि इस सिंडिकेट को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हवा देने वाले संदिग्ध चेहरों को बेनकाब करने के लिए भी कानूनी स्तर पर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, जिन्हें बहुत जल्द उचित समय पर प्रशासनिक व पुलिस जांच के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
दोनों के खिलाफ FIR और गिरफ्तारी की मांग तेज
वाहन मालिक के इस कबूलनामे और वन विभाग के आधिकारिक दस्तावेजों से यह साफ हो गया है कि जूही तिवारी और प्रवीण पुजारी मिलकर सीधे-साधे गाड़ी मालिकों को धोखे में रखकर लकड़ी तस्करी का अवैध धंधा संचालित कर रही थीं। गौरतलब है कि इसी सिंडिकेट के द्वारा पत्रकार दुर्गानाथ देवांगन को भी फंसाने के लिए बिना किसी बातचीत के उनके फोन-पे पर ₹2500 एकतरफा ट्रांसफर कर आपराधिक षड्यंत्र रचा गया था।
कोंडागांव के पत्रकारों ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि ज्योति उर्फ जूही तिवारी तथा उनकी सहयोगी प्रवीण पुजारी दोनों के खिलाफ तत्काल धोखाधड़ी, वन संपदा की अवैध चोरी, साक्ष्य नष्ट करने और निष्पक्ष पत्रकारों के खिलाफ साजिश रचने की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
