संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव जिला अस्पताल में बदहाली और मनमानी के खिलाफ फूटा आक्रोश: सीएमएचओ को सौंपा गया ज्ञापन, निजी अस्पतालों से सांठगांठ का लगाया आरोप
उजाला टुडे कोंडागांव 08 सितंबर 2026-कोंडागांव:जिला अस्पताल कोंडागांव की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीजों से दुर्व्यवहार और निजी अस्पतालों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कार्यशैली को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कड़ी नाराजगी जताई गई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अस्पताल अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर आम नागरिकों को बदहाली की आग में झोंक रहा है।
कतारों की मार और कर्मचारियों की लापरवाही
ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया कि अस्पताल में पंजीयन प्रक्रिया इतनी जटिल और धीमी है कि मरीजों को घंटों कतार में खड़े होकर परेशान होना पड़ रहा है।
इसके अतिरिक्त तकनीकी अव्यवस्था का आलम यह है कि कभी जांच मशीनें महीनों खराब पड़ी रहती हैं, तो कभी उन्हें संचालित करने वाले कर्मचारी ड्यूटी से नदारद रहते हैं। आपातकालीन सेवाओं, विशेषकर एंबुलेंस सुविधा के नाम पर मरीजों को भारी उपेक्षा झेलनी पड़ रही है।
निजी अस्पतालों में रेफर करने का खेल
ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया कि अस्पताल प्रशासन द्वारा मरीजों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और कई मामलों में उन्हें सीधे निजी अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है। शहर के निजी संस्थान बाहर से डॉक्टरों को बुलाने के नाम पर मरीजों से भारी-भरकम राशि वसूल कर रहे हैं, जिनकी शासकीय मान्यता तक स्पष्ट नहीं होती। आरोप लगाया गया कि सरकारी अस्पताल अपनी लचर सेवाओं के जरिए इन निजी संस्थानों को लाभ पहुंचाने का काम कर रहा है।
प्रमुख मांगें:
- ड्यूटी रोस्टर का प्रदर्शन: मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल के मुख्य द्वार पर प्रतिदिन डॉक्टरों का रोस्टर, विशेषज्ञता और उनके बैठने का स्थान स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए।
- सरल पंजीयन व्यवस्था: पर्ची व पंजीयन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि आम जनता को बिना परेशानी समय पर इलाज मिल सके।
- एंबुलेंस संचालन में पारदर्शिता: एंबुलेंस की उपलब्धता, निर्धारित शुल्क और वर्तमान स्थिति की जानकारी सार्वजनिक पटल पर दर्ज की जाए।
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई है कि जनहित से जुड़े इन सभी बिंदुओं पर तत्काल संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि जिले के जरूरतमंद मरीजों को बुनियादी व निष्पक्ष स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।


