संजय सोनपिपरे संपादक, संजय सोनपिपरे
बाबा साहेब सेवा संस्था ने मनाई संत कबीर दास जी की 649वीं जयंती, सामाजिक समरसता का दिया संदेश
उजाला टुडे कोंडागांव 01 जुलाई 2026-कोंडागांव:स्थानीय बाबा साहेब सेवा संस्था द्वारा संत कबीर दास जी की 649वीं जयंती के पावन अवसर पर एक गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्था के सदस्यों और स्थानीय प्रबुद्धजनों ने कबीर दास जी के तैलचित्र पर सादर नमन करते हुए उनके अमूल्य सामाजिक योगदान को याद किया।
दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ अत्यंत गरिमापूर्ण माहौल में हुआ। संस्था के पदाधिकारियों ने संत कबीर दास जी और परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया और माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कबीर वाणी और विचार संगोष्ठी का आयोजन
जयंती के अवसर पर एक विशेष विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित वक्ताओं ने कबीर जी के प्रसिद्ध दोहों और साखियों का सस्वर वाचन किया। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि सदियों पहले कहे गए कबीर के दोहे आज के आधुनिक समाज में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। संगोष्ठी में संस्था के पदाधिकारियों ने कबीर जी के सामाजिक सुधारों और तात्कालिक रूढ़िवादी कुप्रथाओं के खिलाफ उनके कड़े संघर्षों पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।
“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोइ।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होइ॥”
मानवता और बंधुत्व के मार्ग पर चलने का संकल्प
संस्था के सदस्यों ने कबीर दास जी के संदेशों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने आजीवन समाज में फैली ऊंच-नीच, जाति-पाति और पाखंड का पुरजोर खंडन किया। उनका पूरा जीवन सामाजिक समरसता, बंधुत्व और मानवता के लिए समर्पित था। बाबा साहेब सेवा संस्था भी उनके इन्हीं सिद्धांतों और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए निरंतर संकल्पित है।
वरिष्ठ जन रहे उपस्थित
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित नागरिकों और कार्यकर्ताओं ने कबीर दास जी के बताए मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से:
- भुवनलाल मार्कंडेय (अध्यक्ष, बाबा साहेब सेवा संस्था,मन्नाराम नेताम (बामसेफ),हितेंद्र कुमार श्रीवास (उपाध्यक्ष),देवानंद चोरे,मुकेश मार्कंडेय,
- संजय सोनपिपरे
सहित संस्था के अन्य प्रमुख पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
