संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव वन विभाग की ‘कथित’ मेहरबानी: आम और सेमल की तस्करी को SDO का संरक्षण?
गाड़ियों को बिना कार्रवाई छोड़ा; नियमों की गलत व्याख्या कर तस्करों को दिया अभयदान!
उजाला टुडे कोंडागांव 13 अप्रैल 2026- छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में फलदार और प्रतिबंधित वृक्षों की अवैध कटाई और तस्करी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला आज सुबह 9:00 बजे बोरगांव फरसगॉव के पास सामने आया, जहाँ मुखबिर की सटीक सूचना पर वन विभाग के अमले ने लकड़ी से लदी दो गाड़ियों को घेराबंदी कर पकड़ा। हालांकि, विभाग के एक ‘विवादास्पद’ आदेश ने पूरे अभियान की सफलता पर पानी फेर दिया।
घटनाक्रम: तड़के हुई घेराबंदी, फोन पर हुई रिहाई
पकड़े गए वाहनों का विवरण इस प्रकार है:
- वाहन क्रमांक: CG-07 CH 6304
- वाहन क्रमांक: CG-07 CJ 3729
इन दोनों गाड़ियों में भारी मात्रा में प्रतिबंधित आम और सेमल की लकड़ियां भरी हुई थीं। जैसे ही कर्मचारियों ने जांच शुरू की, उपवनमंडलधिकारी (SDO) एन.के. सिन्हा का एक फोन आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिकारी ने मौके पर मौजूद अमले को निर्देश दिया कि “गाड़ियों के कागज ओके हैं, इन्हें तुरंत छोड़ दिया जाए।”
बड़ा सवाल: क्या बिना भौतिक सत्यापन और ट्रांजिट पास (TP) की मौके पर जांच किए, महज एक फोन कॉल के आधार पर अवैध वनोपज को वैध घोषित किया जा सकता है?
दुर्ग नंबर की गाड़ियां और अंतर्राज्यीय तस्करी का संदेह
पकड़ी गई दोनों गाड़ियां दुर्ग-भिलाई (CG-07) पासिंग हैं। स्थानीय ग्रामीणों का सवाल वाजिब है—यदि लकड़ी का परिवहन इतना ही सरल है, तो दुर्ग से गाड़ियां विशेष रूप से कोंडागांव के ग्रामीण अंचलों में लकड़ी लेने क्यों आ रही हैं? यह किसी बड़े संगठित गिरोह की ओर इशारा करता है।
कैमरे से भागे अधिकारी; वीडियो में कैद हुआ विरोधाभास
जब मीडिया ने इस संदिग्ध कार्रवाई पर SDO सिन्हा से पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने कैमरे पर बाइट देने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, मीडिया के पास उपलब्ध विशेष वीडियो रिकॉर्डिंग में अधिकारी यह तर्क देते सुने जा रहे हैं कि “आम और सेमल को पंचायत स्तर पर बिना किसी अनुमति के काटकर परिवहन किया जा सकता है।” विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकारी का यह बयान न केवल भ्रामक है, बल्कि विभागीय राजपत्र के भी खिलाफ है।
क्या कहता है कानून? (तथ्यों की पड़ताल)
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता और भारतीय वन अधिनियम के तहत नियम अत्यंत सख्त हैं:
- आम और सेमल: आम एक फलदार वृक्ष है और सेमल इमारती लकड़ी की श्रेणी में आता है। इनकी कटाई के लिए राजस्व विभाग (SDO राजस्व) की अनुमति अनिवार्य है।
- ट्रांजिट पास (TP): बिना ‘हथौड़ा निशान’ और वन विभाग के TP के इनका परिवहन पूरी तरह अवैध है।
- छूट की श्रेणी: प्रदेश में केवल नीलगिरी, बबूल और सूबबूल जैसी प्रजातियों को ही परिवहन पास से छूट प्राप्त है।
अधिकारियों की चुप्पी और गहराते सवाल
- क्या पंचायत के पास यह संवैधानिक अधिकार है कि वह वन विभाग के टीपी के बिना लकड़ी का अंतर्राज्यीय या अंतर्जिलीय परिवहन करवा दे?
- बोरगांव में पकड़ी गई लकड़ियां कहाँ से आ रही थीं और उनका अंतिम गंतव्य क्या था?
- SDO द्वारा नियमों की गलत व्याख्या करना क्या किसी बड़े भ्रष्टाचार को छुपाने की कोशिश है?
इस प्रकरण ने जिला प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि क्या उच्चाधिकारी इस ‘संदिग्ध’ आदेश की जांच करेंगे या फिर नियमों की आड़ में कोंडागांव के हरे-भरे जंगल इसी तरह बलि चढ़ते रहेंगे।
