संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
नक्सल मुक्त कोंडागांव में अब ‘मुस्कान’ की गूँज: पुलिस ने लौटाई 39 परिवारों की खुशियाँ
उजाला टुडे कोंडागांव 02 मई 2026-कोंडागांव एक तरफ जहां बस्तर संभाग का जिला कोंडागांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, वहीं अब जिला पुलिस ने मानवीय संवेदनाओं की एक नई मिसाल पेश की है। कोंडागांव पुलिस के विशेष अभियानों—‘ऑपरेशन मुस्कान’ और ‘ऑपरेशन तलाश’—ने महज एक महीने (अप्रैल 2026) के भीतर 39 घरों के बुझते चिरागों को फिर से रौशन कर दिया है।
मिशन मोड में चली खोज: 12 मासूमों को मिला माँ का आँचल
अप्रैल माह के दौरान पुलिस ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत उन 12 गुमशुदा बच्चों को ढूंढ निकाला, जो महीनों से अपने परिवार से बिछड़े हुए थे। पुलिस की विशेष टीमों ने आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया का सहारा लेकर मुंबई और तमिलनाडु जैसे सुदूर राज्यों से इन बच्चों को सकुशल बरामद किया। जब ये बच्चे अपने माता-पिता की गोद में लौटे, तो पुलिस कार्यालय के गलियारे भावुक आँसुओं और मुस्कान से भर गए।
‘ऑपरेशन तलाश’: अपनों से मिलन की सफल दास्तां
इसी कड़ी में ‘ऑपरेशन तलाश’ के जरिए 27 वयस्क व्यक्तियों (पुरुष व महिला) को विभिन्न राज्यों से ट्रेस किया गया। ये वे लोग थे जो रोजगार की तलाश या अन्य पारिवारिक कारणों से घर से दूर हो गए थे और परिजनों का उनसे संपर्क टूट चुका था। पुलिस की सक्रियता ने इन 27 परिवारों का इंतजार भी खत्म कर दिया।
सफलता के पीछे की रणनीति
पुलिस अधीक्षक आकाश श्रीमाल के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चन्द्रा के निर्देशन में यह पूरा अभियान एक सोची-समझी रणनीति के तहत चलाया गया।
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- अंतरराज्यीय समन्वय: अन्य राज्यों की पुलिस के साथ बेहतर तालमेल।
- तकनीकी टीम: डेटा विश्लेषण और लोकेशन ट्रेसिंग में आधुनिक सूचना तंत्र का उपयोग।
- विशेष सेल: जिला मुख्यालय पर एक समर्पित सेल की निरंतर मॉनिटरिंग।
“गुमशुदगी किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ा दर्द है। हमारा संकल्प है कि जिले का कोई भी व्यक्ति लापता न रहे। अप्रैल माह की यह सफलता साबित करती है कि नक्सल मुक्त कोंडागांव अब नागरिक सुरक्षा और बाल-कल्याण का नया प्रतीक बन चुका है।” > — आकाश श्रीमाल, पुलिस अधीक्षक (कोंडागांव)
जिले में हर्ष का माहौल
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चन्द्रा ने पुलिस टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि हर सफल रिकवरी पुलिस के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करती है। कोंडागांव पुलिस की इस उपलब्धि की पूरे प्रदेश में सराहना हो रही है। यह अभियान केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिखरे हुए परिवारों को जोड़ने वाला एक ‘सेतु’ बन गया है।
