संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोण्डागांव: 89 लाख का ‘धान घोटाला’! DO कटा पर गोदाम खाली, सिस्टम की नाक के नीचे गायब हुए 7132 बोरे
उजाला टुडे कोंडागांव 14 मई 2026-कोण्डागांव। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के सरकारी दावों की पोल खोलता हुआ एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। कोण्डागांव जिले के मुलमुला धान खरीदी केंद्र से करीब 7132 बोरे (2852.80 क्विंटल) धान रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया है। सरकारी आंकड़ों में जिस धान का ‘डिलिवरी ऑर्डर’ (DO) जारी हो चुका है, धरातल पर वह धान अस्तित्व में ही नहीं है। इस घोटाले की अनुमानित कीमत करीब 89 लाख रुपये बताई जा रही है।
कागजों में ‘पुल’ और मौके पर ‘धूल’
जिले में खरीफ सीजन की धान खरीदी पूरी होने के बाद जब मिलर अपना अलॉटेड धान उठाने मुलमुला केंद्र पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए। रिकॉर्ड के मुताबिक वहां 7000 से अधिक बोरे होने चाहिए थे, लेकिन मौके पर महज 1000-1500 बोरे ही मिले। मिलरों ने खाली गोदाम देखकर धान उठाने से इनकार कर दिया है।
फर्जी एंट्री और गबन की आशंका
सूत्रों का दावा है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी ‘पंजीबद्ध धोखाधड़ी’ है। आशंका जताई जा रही है कि केंद्र प्रभारी ने अपने करीबियों और ‘सेटेड’ किसानों के नाम पर फर्जी एंट्री कर समर्थन मूल्य की राशि का बंदरबांट कर लिया है। यानी धान कभी केंद्र पहुंचा ही नहीं, सिर्फ कागजों पर खरीदी दिखाकर करोड़ों का खेल कर दिया गया।
रात के अंधेरे में ‘भरपाई’ की कोशिश
मामला जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद अब केंद्र में अफरा-तफरी का माहौल है। खबर है कि अपनी गर्दन बचाने के लिए अब इधर-उधर से धान जुटाकर स्टॉक पूरा करने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, तड़के सुबह पिकअप और ‘छोटा हाथी’ जैसे वाहनों से चोरी-छिपे 200-300 बोरे केंद्र में डंप किए गए हैं, ताकि जांच टीम को गुमराह किया जा सके।
जिम्मेदार क्या कहते हैं?
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- कुमाता पटेल (केंद्र प्रभारी): इनका कहना है कि धान कहीं और रखवाया गया था जिसे जल्द वापस लाया जाएगा। हालांकि, सरकारी नियमों के तहत धान को केंद्र से बाहर कहीं और रखना पूरी तरह अवैध है।
- गोविन्द मण्डल (लैम्प्स प्रबंधक): इन्होंने केंद्र प्रभारी पर ठीकरा फोड़ते हुए इसे ‘किसानों के साथ खिलवाड़’ बताया है और मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को देने की बात कही है।
- प्रशासनिक रुख: जिला खाद्य अधिकारी नवीन श्रीवास्तव ने नोटिस जारी कर कार्रवाई की बात कही है।
निष्पक्ष जांच की मांग: खातों को खंगालना जरूरी
स्थानीय जानकारों और किसानों का कहना है कि यह घोटाला केवल नोटिस तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि इस मामले में संलिप्त अधिकारियों, केंद्र प्रभारी और उनके परिजनों के बैंक खातों की गहन जांच की जाए, तो गबन की गई राशि का सच आसानी से सामने आ सकता है।
सवाल यह है कि क्या प्रशासन केवल ‘निपटारे’ के मोड में रहेगा या जिला स्तर तक जवाबदेही तय कर दोषियों को जेल भेजेगा? सीसीटीवी और सख्त मॉनिटरिंग के दावों के बीच 7000 बोरों का गायब होना पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा ‘प्रश्नचिन्ह’ है।
