संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
पुलिसिंग पर सवाल: दबंगों की मारपीट से ग्रामीण गंभीर, अनतपुर पुलिस ने FIR के बजाय थमाया नोटिस; CPI ने की SP से शिकायत
उजाला टुडे कोंडागांव 18 जुलाई 2026-कोण्डागांव:माकड़ी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम बिंजोली में एक ग्रामीण को बैठक के बहाने बुलाकर बेरहमी से पीटने और गंभीर हालत में अस्पताल भेजने के बजाय घर लौटा देने का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इस घटना को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने अनतपुर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वर्तमान में गंभीर रूप से घायल ग्रामीण को जिला अस्पताल कोण्डागांव में भर्ती कराया गया है।
क्या है पूरा मामला?
CPI जिला परिषद कोण्डागांव के जिला सचिव शैलेष शुक्ला ने पीड़ित गबरु पोयाम से मुलाकात के बाद घटना की जानकारी प्रेस से साझा की। उन्होंने बताया कि 16 जुलाई की सुबह ग्राम बिंजोली निवासी गबरु पोयाम को ग्राम घोड़सोड़ा के कुछ लोग यह कहकर घर से बुलाकर ले गए कि उनकी काबिज कास्त वन भूमि (सरहदी क्षेत्र) पर एक बैठक रखी गई है।
बैठक स्थल पर घोड़सोड़ा के करीब 25 ग्रामीण पहले से मौजूद थे। वहां विवाद बढ़ा और चार ग्रामीणों ने गबरु पोयाम पर लात-घूंसों से हमला कर दिया। सिर, गले और कमर पर गंभीर चोटें आने के कारण गबरु बेहोश हो गया।
अमानवीयता की हद: आरोपी बेहोश गबरु को अपने कंधे पर लादकर घोड़सोड़ा गांव की तरफ ले जाने लगे। यह देख बिंजोली के ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर उसे छुड़ाया और किसी तरह उसके घर पहुंचाया।
थाने में FIR के बजाय मिला नोटिस
परिजन और कम्युनिस्ट साथी लक्ष्मण जब घायल गबरु को लेकर अनतपुर थाने पहुंचे, तो पुलिस का रवैया बेहद असंवेदनशील रहा। मौखिक शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज करने के बजाय पुलिस ने लिखित आवेदन की मांग की। लिखित शिकायत देने के बाद पुलिस घायल को माकड़ी अस्पताल ले गई, जहाँ उसका प्राथमिक उपचार और मुलाहिजा (MLC) कराया गया।
लेकिन इसके बाद पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो गए। अस्पताल से वापस थाने लाने के बाद पुलिस ने आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय, गंभीर रूप से घायल गबरु को एक लिखित नोटिस थमा दिया और विवादित जमीन के दस्तावेज लेकर थाने आने की बात कहकर घर वापस भेज दिया।
तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल में भर्ती
माकड़ी अस्पताल में दिए गए दर्द निवारक इंजेक्शन का असर जब रात में खत्म हुआ, तो पीड़ित गबरु के सिर और कमर में असहनीय दर्द शुरू हो गया। 17 जुलाई को उसकी पत्नी और अन्य ग्रामीणों ने उसे जिला अस्पताल कोण्डागांव लाकर भर्ती कराया, जहाँ उसका इलाज जारी है।
CPI ने उठाए पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले को लेकर CPI जिला परिषद कोण्डागांव ने पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है। पार्टी ने अनतपुर पुलिस के व्यवहार की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत पत्र में पुलिस से पूछे गए तीखे सवाल:
- जब ग्रामीण बेहोशी की हालत में था, तो पुलिस ने उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने के बजाय वापस गांव क्यों भेज दिया?
- पुलिस के लिए घायल का इलाज कराना ज्यादा जरूरी था या जमीन के दस्तावेज मंगाना?
- अगर पीड़ित के पास जमीन के दस्तावेज नहीं भी हैं, तो क्या घोड़सोड़ा के ग्रामीणों को उसके साथ मारपीट करने का अधिकार मिल जाता है?
SP की ‘क्राइम बैठक’ के दावों की परीक्षा
कोण्डागांव जिला पुलिस अधीक्षक लगातार ‘क्राइम बैठकें’ लेकर मातहतों को सही और संवेदनशील पुलिसिंग के निर्देश दे रहे हैं। अब देखना यह है कि पीड़ित गबरु के साथ हुए इस दोहरे अन्याय और अनतपुर पुलिस के इस लचर रवैये पर पुलिस अधीक्षक कब तक और क्या ठोस कार्रवाई करते हैं।



