संजय सोनपिपिरे संपादक,उजाला टुडे कोंडागांव
मात्र ₹2000 में जीवन यापन को मजबूर मध्यान्ह भोजन रसोइया: मानदेय बढ़ोतरी की मांग, वरना होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन!
उजाला टुडे कोंडागांव:-02 अगस्त 2025 रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ की प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में बीते 28 सालों से अपनी सेवाएं दे रही मध्यान्ह भोजन रसोइयों का जीवन घोर आर्थिक संकट में है। ये रसोइया, जो बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ विद्यालयी व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं, मात्र ₹2000 मासिक मानदेय पर काम करने को मजबूर हैं। इस बेहद कम राशि में उनके लिए अपने परिवार का दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
वादों की हवाबाजी और टूटती उम्मीदें
रसोइयों को बार-बार मानदेय बढ़ाने के आश्वासन दिए गए, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। हाल ही में हुए चुनावों से पहले “मोदी की गारंटी” के तहत 50 प्रतिशत मानदेय वृद्धि का वादा भी किया गया था, पर अब वह भी अनसुना होता दिख रहा है, जिससे उनकी उम्मीदें टूट रही हैं।
सम्मानजनक जीवन की मांग और आंदोलन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन, कोंडागांव के जिला संयोजक शिवराज सिंह ठाकुर ने सरकार से तुरंत मध्यान्ह भोजन रसोइयों के मानदेय में वृद्धि की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन रसोइयों को ₹5000 मासिक मानदेय देने का आदेश जल्द से जल्द जारी किया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
ठाकुर ने यह भी साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही इस मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। यह मांग न केवल न्यायसंगत है, बल्कि इन मेहनतकश महिलाओं की गरिमा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भी बेहद ज़रूरी है। सरकार से अपील की गई है कि इस महत्वपूर्ण वर्ग की अनदेखी न करते हुए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।

