संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
केशकाल की सड़क नहीं, यहाँ की तकदीर बन रही है या बिगड़ रही है?
उजाला टुडे कोंडागांव 25 सितम्बर 2025- केशकाल की सड़कों ने आज एक गहरी सांस ली है। यह खबर सिर्फ 8 करोड़ 19 लाख 67 हजार रुपये की मंजूरी की नहीं है, बल्कि यह उन हजारों चेहरों पर आई एक उम्मीद की चमक है जो सालों से धूल और दर्द के साथ जी रहे थे। NH-30 की सड़क, जिसे यहाँ की धड़कन कहा जाता है, अब नई जिंदगी पाने जा रही है।
गड्ढों का दर्द और एक नई सुबह का इंतजार
यह सिर्फ डामर और गिट्टी की कहानी नहीं है, यह उस किसान के संघर्ष की दास्तान है जो अपनी फसल को मंडी तक पहुंचाने के लिए हर दिन मौत को चकमा देता है। यह उस बीमार इंसान की कहानी है जिसे अस्पताल तक पहुँचने में हर गड्ढे पर एक नया दर्द मिलता था। यह सड़क सिर्फ रास्ता नहीं थी, यह एक ऐसा घाव थी जो हर गुजरते दिन के साथ गहराता जा रहा था।
अब जब इस जख्म पर मरहम लगाने के लिए इतनी बड़ी रकम आई है, तो लोगों की आँखों में खुशी के साथ-साथ एक डर भी है। पिछली कई बार की असफलताओं और अधूरे कामों ने इस उम्मीद को थोड़ा कमजोर कर दिया है। सवाल यह है कि क्या यह पैसा सच में एक मजबूत और टिकाऊ सड़क बनाएगा, या फिर पुरानी कहानियों की तरह यह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा?
लोग जानते हैं कि पैसा बहुत है, लेकिन क्या ईमानदारी भी उतनी ही है?
जनता की कसौटी पर विकास
आज केशकाल का हर नागरिक इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा निरीक्षक है। वे हर एक ईंट, हर एक पत्थर और हर एक पाई का हिसाब देखना चाहते हैं। यह सिर्फ एक सड़क नहीं है, यह सरकारी वादों और जनता के विश्वास की कसौटी है।
यह देखने वाली बात होगी कि क्या यह राशि सच में केशकाल की तकदीर बदलेगी? क्या यह सड़क सच में आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित भविष्य की नींव बनेगी? केशकाल उम्मीद के साथ इंतजार कर रहा है, यह जानते हुए कि असली परीक्षा तो अब शुरू हुई है।


