
संजय सोनपिपरे संपादक,उजाला टुडे कोंडागांव
“शिल्पनगरी” कोंडागांव की पहचान पर खतरा! NH-30 किनारे ‘जहरीले’ कचरे का अंबार, बदबू से आम जनता बेहाल
उजाला टुडे कोंडागांव 17 अक्टूबर 2025- कोंडागांव (छत्तीसगढ़)। ढोकरा कला और शिल्पकला के लिए देश-दुनिया में विख्यात कोंडागांव शहर की छवि पर इन दिनों गहरा दाग लग रहा है। जिस धरती ने अपनी कला से वैश्विक पहचान बनाई है, आज वही ज़मीन राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) के किनारे फेंके गए रासायनिक और प्लास्टिक कचरे के विशाल ढेर और तेज़ बदबू से कराह रही है।
स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह सिर्फ गंदगी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है, जिसकी अनदेखी प्रशासनिक अधिकारी लगातार कर रहे हैं।
कला के साथ कचरे का ढेर: पर्यटकों के लिए शर्मिंदगी
हर साल हज़ारों की संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक कोंडागांव की अनूठी ढोकरा कला और अन्य हस्तशिल्प को देखने आते हैं। लेकिन अब उन्हें कलाकृतियों के साथ-साथ सड़क किनारे बदबूदार कचरे के ढेर भी देखने को मिल रहे हैं। एक स्थानीय नागरिक ने दुख व्यक्त करते हुए कहा, “हम अपनी कला पर गर्व करते थे, लेकिन अब हमें पर्यटकों के सामने शर्मिंदा होना पड़ता है। उन्हें कला के साथ बदबू की निशानी मिल रही है।”
अधिकारी एसी गाड़ियों में, आम जनता बदबू की शिकार
शिकायत यह है कि NH-30 के किनारे फेंके गए ये पदार्थ देखने में किसी जहरीले रासायनिक कचरे जैसे लगते हैं, जिनसे उठने वाली तेज़ बदबू दूर तक फैलती है, जिससे राहगीरों और आसपास के लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारीगण अक्सर एसी गाड़ियों के शीशे बंद कर यहाँ से गुज़र जाते हैं, उन्हें आम जनता के लिए बनी ‘इस हवा’ की गुणवत्ता से कोई फर्क नहीं पड़ता।
स्वास्थ्य का खतरा और खतरे की घंटी
अगर यह फेंका गया पदार्थ वास्तव में जहरीला या रासायनिक कचरा है, तो यह कोंडागांव के नागरिकों के लिए स्वास्थ्य का एक गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। इससे त्वचा रोग, सांस की समस्या, और विभिन्न संक्रमण फैलने का खतरा है। स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत इस ‘खतरे की घंटी’ को सुनना चाहिए।
कोंडागांव की जनता ने की प्रशासन से सीधी मांग:
स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने एक स्वर में प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- तत्काल जांच: NH-30 किनारे फेंके गए पदार्थों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए ताकि इसकी प्रकृति (रासायनिक, प्लास्टिक, या अन्य जहरीला) का पता चल सके।
- वैज्ञानिक निपटान: अगर यह प्लास्टिक या रासायनिक कचरा है, तो उसका वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग और सुरक्षित तथा स्थायी निपटान सुनिश्चित किया जाए।
- कठोर कानूनी कार्रवाई: इस तरह के कचरे को सार्वजनिक स्थल पर फेंकने वाले ज़िम्मेदार व्यक्तियों और इकाइयों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि आगे कोई ऐसी गलती न दोहराए।
- प्रबंधन व्यवस्था: शहर में प्लास्टिक वेस्ट कलेक्शन और रीसाइक्लिंग सेंटर की व्यवस्थित व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में ऐसे डंपिंग साइट्स न बनें।
“अब चुप्पी नहीं, कार्रवाई चाहिए!”
कोंडागांव की पहचान उसकी कला है, कचरा नहीं। नागरिकों का कहना है कि यह शहर तभी गौरव से सिर उठा पाएगा, जब यह स्वच्छ और ज़िम्मेदार होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि “अब चुप्पी नहीं, कार्रवाई चाहिए! कोंडागांव की हवा में बदबू नहीं, कला और जिम्मेदारी की खुशबू होनी चाहिए।”
प्रशासन को इस जनभावना का सम्मान करते हुए तुरंत इस समस्या पर ध्यान देना होगा, अन्यथा शिल्पनगरी की छवि धूमिल होने के साथ-साथ यहाँ के नागरिकों का स्वास्थ्य भी खतरे में पड़ जाएगा।


