संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
नक्सली लीडर रूपेश ने 206 साथियों संग डाले हथियार, 19 AK-47 और 134 अन्य घातक वेपन पुलिस के हवाले; CM साय ने कहा- 2026 तक छत्तीसगढ़ होगा ‘नक्सल-मुक्त’
उजाला टुडे कोंडागांव17 अक्टूबर 2025- कोंडागांव जगदलपुर/: छत्तीसगढ़ के नक्सल विरोधी अभियान में शुक्रवार को एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। देश के इतिहास में सबसे बड़े सामूहिक आत्मसमर्पण को अंजाम देते हुए, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के प्रवक्ता और माड़ डिवीजन के बड़े नक्सली लीडर रूपेश ने 206 महिला-पुरुष कैडरों के साथ मुख्यधारा में वापसी कर ली है। इस ऐतिहासिक घटना ने उत्तरी बस्तर और अबूझमाड़ के एक बड़े हिस्से से ‘लाल आतंक’ के खात्मे का बिगुल बजा दिया है।
लाल गढ़ में शांति की दस्तक
यह आत्मसमर्पण न केवल संख्या के लिहाज से बल्कि संगठन के कैडर के स्तर पर भी बेहद महत्वपूर्ण है। आत्मसमर्पण करने वालों में रूपेश जैसे प्रमुख नेता के साथ डिविजनल कमेटी मेंबर (DCM), एरिया कमेटी मेंबर (ACM) और पीएलजीए के कई सक्रिय सदस्य शामिल हैं।
इन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की मौजूदगी में 153 अत्याधुनिक हथियार (जिनमें 19 AK-47, 17 SLR और 23 INSAS राइफलें शामिल हैं) सुरक्षा बलों के सामने सौंप दिए।
नक्सली लीडर का बड़ा खुलासा: ‘न लोग बचे, न संसाधन’
आत्मसमर्पण से पहले लीडर रूपेश ने मीडिया से बातचीत में बड़ा खुलासा किया। उसने बताया कि सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन, खासकर पिछले एक साल में हुई निर्णायक कार्रवाईयों और मुठभेड़ों ने माड़ इलाके में संगठन की कमर तोड़ दी है।
“माड़ इलाके में अब नक्सलियों के सारे विभाग खत्म हो चुके हैं। हमारे पास न तो लड़ाई लड़ने के लिए लोग बचे हैं और न ही संसाधन। संगठन आंतरिक कलह और दबाव से टूट चुका है। हमने हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और पुनर्वास नीति को अपनाना ही बेहतर समझा।”
– रूपेश, आत्मसमर्पण करने वाला नक्सली लीडर
सरकार की ‘रेड कार्पेट’ नीति की जीत
इस ऐतिहासिक सफलता को छत्तीसगढ़ सरकार की नई ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ की बड़ी जीत माना जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने एक बार फिर दोहराया कि उनकी सरकार आत्मसमर्पण करने वाले हर नक्सली का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए हर संभव मदद देगी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह ‘नियद नेल्ला नार’ योजना (जिसका अर्थ है- आपका अच्छा गाँव) और सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति का परिणाम है। उन्होंने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश को नक्सल मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया।
उत्तरी बस्तर हुआ नक्सल-मुक्त
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस सामूहिक आत्मसमर्पण से अबूझमाड़ का अधिकांश हिस्सा नक्सली प्रभाव से मुक्त हो गया है। उत्तरी बस्तर में अब शांति और विकास के कार्यों को तेज गति से लागू किया जाएगा, जो दशकों से लाल आतंक के कारण रुक गए थे। यह घटना निश्चित तौर पर बचे हुए नक्सलियों पर भी आत्मसमर्पण करने का दबाव बढ़ाएगी।



