संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
💥 नक्सलवाद पर ऐतिहासिक प्रहार: 41 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, ₹1.19 करोड़ के इनामी ध्वस्त
उजाला टुडे कोंडागांव 26 नवम्बर 2025- बीजापुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे निर्णायक नक्सल विरोधी अभियानों और राज्य सरकार की प्रभावी ‘पूना मारगेम’ पुनर्वास नीति के चलते माओवादियों को एक बड़ा झटका लगा है। बीजापुर जिले में बुधवार को एक साथ 41 सक्रिय और वांछित नक्सलियों ने पुलिस और प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
💰 सरेंडर करने वाले 32 नक्सलियों पर ₹1.19 करोड़ का इनाम
यह आत्मसमर्पण इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह संगठनात्मक पदानुक्रम के कई महत्वपूर्ण सदस्यों को मुख्यधारा में वापस लाया है। इन सभी नक्सलियों पर पुलिस को लंबे समय से तलाश थी और इन पर सामूहिक रूप से ₹1 करोड़ 19 लाख का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख इनामी कैडर (32 नाम):
- बटालियन के शीर्ष सदस्य (₹8-8 लाख के इनामी): पीएलजीए बटालियन-01 से जुड़े पंडरू हपका उर्फ मोहन, उसकी पत्नी बंडी हपका, लक्खू कोरसा, बदरू पुनेम, और सुखराम हेमला जैसे दुर्दांत नक्सली शामिल हैं, जिन पर अकेले ₹8 लाख का इनाम था।
- एरिया/मिलिशिया कमांडर (₹5-5 लाख के इनामी): इनमें मिलिशिया कमांडर मल्ला हेमला, डिवीजनल कमेटी सदस्य भीमा कुंजाम, एरिया कमेटी सदस्य लच्छू ओयाम और मुन्नी पुनेम शामिल हैं। इनके अलावा सुकलू पुनेम, मासे मरकाम, रमैया सोढ़ी, मोटू सोढ़ी, और आयतु हेमला भी इसी श्रेणी के इनामी कैडर थे।
- महिला और अन्य इनामी सदस्य (₹3-3 लाख के इनामी): महिला मिलिशिया सदस्य सुमित्रा कोरसा, मंगली मण्डावी, मुक्की उईके, तथा पुरुष कैडर में सुक्का पुनेम, सन्तोष मण्डावी, बुधराम हेमला, मासा कुंजाम, जोगा हेमला, मुन्नी माड़वी, भीमा कोरसा, सोमडी हेमला, मंगली सोढ़ी, मुन्नी कोरसा, जोगा उईके, मुन्नी मण्डावी, कोसा कोरसा, कोसा सोढ़ी, और आयतु पुनेम शामिल हैं।
👤 अन्य सरेंडर करने वाले सदस्य (9 नाम)
आत्मसमर्पण करने वाले 41 कैडरों में बाकी 9 सदस्य माओवादी संगठन की विभिन्न इकाईयों में सक्रिय थे, जिन पर इनामी राशि की सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई थी। इनके नाम हैं: लिंगू कवासी, रामा पोड़ियाम, सुन्नी कोरसा, मन्नी कोर्राम, सोनाली मण्डावी, बुधराम पुनेम, सोमलू कोरसा, लच्छू मण्डावी, और रंगा सोढ़ी।
📣 सुरक्षा बलों की रणनीति की जीत
- लगातार दबाव: सुरक्षा बलों ने घने जंगलों में अपने ऑपरेशनों की तीव्रता बढ़ाई है, जिससे नक्सलियों को सुरक्षित ठिकाने नहीं मिल पा रहे हैं।
- मोहभंग: आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने बताया कि वे माओवादी नेतृत्व की शोषणकारी नीतियों, भेदभाव, और लगातार जंगलों में भूख-प्यास से परेशान थे।
- पुनर्वास का आश्वासन: राज्य सरकार द्वारा ‘पूना मारगेम’ के तहत ₹50,000 की तत्काल सहायता और भविष्य में पुनर्वास तथा रोजगार देने के आश्वासन ने उन्हें हथियार डालने के लिए प्रेरित किया।
इस बड़े सामूहिक आत्मसमर्पण को बस्तर क्षेत्र में शांति की बहाली की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।


