संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
जिला पंचायत कोण्डागांव में ‘EPF एक्ट 1952’ की उड़ी धज्जियां:पूर्व कर्मचारियों का हक डकारने की साजिश?
उजाला टुडे कोंडागांव 14 जनवरी 2026- कोण्डागांव: जिला पंचायत कोण्डागांव में कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) भुगतान को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आ रहा है। आरोप है कि कार्यालय अधीक्षक गजेंद्र कश्यप और संविदा लेखपाल हरेंद्र देवांगन ने कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन करते हुए पूर्व कर्मचारियों के हक पर डाका डाला है।
नियमों को ठेंगा: चहेतों को रेवड़ी, पूर्व कर्मियों को ठेंगा
नियमों के अनुसार, EPF का लाभ कर्मचारी की सेवा अवधि पर आधारित होता है। यदि किसी के वेतन से कटौती हुई है, तो संस्थान उसे भुगतान रोकने का अधिकार नहीं रखता। बावजूद इसके, कोण्डागांव जिला पंचायत में केवल वर्तमान कर्मचारियों का भुगतान कर औपचारिकता पूरी कर ली गई, जबकि पूर्व कर्मचारियों का डेटा जानबूझकर प्रोसेस नहीं किया गया।
जिम्मेदारी से भागते जिम्मेदार: “मुझे नियम नहीं पता”
मीडिया द्वारा जब इस अनियमितता पर सवाल पूछे गए, तो अधिकारियों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने भ्रष्टाचार की आशंका को और पुख्ता कर दिया:-
- कार्यालय अधीक्षक गजेंद्र कश्यप: उन्होंने साफ कहा कि “मुझे नियमों के बारे में कुछ पता नहीं है।” सवाल यह है कि यदि अधीक्षक को बुनियादी नियमों का ज्ञान नहीं, तो वे महत्वपूर्ण वित्तीय फाइलों पर हस्ताक्षर कैसे कर रहे हैं? ऐसे लापरवाह अधिकारी को पद पर रहने का क्या अधिकार है?
- संविदा लेखपाल हरेंद्र देवांगन: इन्होंने भी पल्ला झाड़ते हुए सारी जिम्मेदारी दूसरों पर डाल दी। एक लेखपाल का नियमों से अनभिज्ञ होना विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

- लेखा अधिकारी गुलशन साहू: उन्होंने स्वीकार किया कि फाइल में गड़बड़ी है और बजट की कमी का बहाना बनाया, जबकि EPF में बजट की प्राथमिकता सभी पात्र कर्मचारियों के लिए समान होती है। वर्तमान बजट आ गया है फरवरी लास्ट तक सभी का भुगतान कर दिया जायेगा।
जिला पंचायत सीईओ की अनुपस्थिति और आगामी कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण पर पक्ष जानने के लिए जब जिला पंचायत सीईओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो ज्ञात हुआ कि वे रायपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण मीटिंग में शामिल होने गए हैं। इस कारण फिलहाल उनका आधिकारिक बयान नहीं लिया जा सका है।
हालांकि, यह स्पष्ट है कि सीईओ के रायपुर से लौटते ही पीड़ित कर्मचारी और मीडिया प्रतिनिधि उनसे मुलाकात करेंगे। इस दौरान लापरवाह अधीक्षक और संविदा लेखपाल के विरुद्ध साक्ष्यों के साथ शिकायत की जाएगी और उनके तत्काल निष्कासन व विभागीय कार्रवाई की मांग की जाएगी।
प्रशासन के सामने खड़े सुलगते सवाल:
- क्या अधीक्षक और लेखपाल की मिलीभगत से जानबूझकर अपनों को लाभ पहुँचाया गया?
- बजट कम होने की स्थिति में केवल वर्तमान कर्मियों को ही भुगतान क्यों? पूर्व कर्मियों की सूची क्यों छिपाई गई?
- क्या प्रशासन ऐसे लापरवाह अधिकारियों को संरक्षण देगा या उन पर गाज गिरेगी?
अगला कदम: जैसे ही सीईओ रायपुर से वापस लौटेंगे, इस मामले में उनकी प्रतिक्रिया और दोषियों पर की गई कार्रवाई की अपडेट रिपोर्ट साझा की जाएगी।

